भदोही के अभोली ब्लॉक का बाल विकास परियोजना कार्यालय रामभरोसे ही संचालित हो रहा है। कार्यालय के संचालन के लिए जहां छह कर्मचारी होने चाहिए, वहां सिर्फ एक सुपरवाइजर की तैनाती की गई है। मजे की बात है कि सुपरवाइर को ही प्रभारी सीडीपीओ बना दिया गया है। सुपरवाइजर शन्नो ही फील्ड विजिट, पोषण ट्रैकर के साथ अन्य सारी व्यवस्थाओं को देखती हैं।
शासन की ओर से एक तरफ जहां कुपोषण को लेकर व्यापक स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। वहीं, दूसरी तरफ यह व्यवस्थाओं के नाम पर जीरो है। ब्लॉकों में संचालित बाल विकास परियोजना कार्यालयों की हालत कुछ वैसी ही है। यहीं से आंगनबाड़ी केंद्रों की मॉनीटरिंग के साथ-साथ यहां तैनात सुपरवाइजरों की मदद से फील्ड विजिट, पोषण ट्रैक पर काम करवाना और लाभार्थियों के मोबाइल में फीडिंग करवाने की जिम्मेदारी होती है।
बाल विकास पुष्टाहार विभाग की ओर से अभोली में संचालित बाल विकास परियोजना कार्यालय इन दिनों रामभरोसे संचालित हो रहा है। कार्यालय पर जहां छह सुपरवाइजरों की तैनाती होनी चाहिए। वहां लगभग एक साल से केवल एक सुपरवाइजर के भरोसे चल रहा है। बताया जाता है कि इसके पहले यहां तैनात सीडीपीओ लीलावती देवी के संबंधी की मौत के बाद उन्होंने काम छोड़ दिया था।
कुछ दिन पहले वे सेवानिवृत्त भी हो गईं। उसके बाद से ही पद रिक्त चल रहा है। इस समय वहां तैनात एक मात्र सुपरवाइजर शन्नो प्रकाश प्रभारी सीडीपीओ की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। इनके ऊपर ही पूरे केंद्रों के संचालन की जिम्मेदारी है। जिला कार्यक्रम अधिकारी मंजू वर्मा ने बताया कि जिले में तमाम पद रिक्त चल रहे हैं। इसे भरने के लिए शासन से पत्राचार किया गया है।