ज्ञानपुर/औराई। पूर्वोत्तर रेलवे के माधोसिंह स्टेशन यार्ड में करीब 100 करोड़ से बनकर तैयार कानकोर कंटेनर डिपो शोपीस बनकर रह गया है। मिर्जापुर-भदोही के कालीन और चुनार के चमकीले मिट्टी के बर्तन उद्योग को बढ़ावा देने के लिए बना डिपो औद्योगिक घरानों का सहयोग न मिलने से शोपीस हो गया है। जिससे सरकार की मंशा धरातल पर फलीभूत नहीं हो पा रही।
भदोही जिले की विश्व विख्यात कालीन उद्योग, मिर्जापुर से पीतल, चुनार के मिट्टी बर्तन का व्यापार मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, जौनपुर, प्रयागराज, कानपुर तक व्यापारी यहां आकर करते थे। माधोसिंह-चिल्ह रेल खंड पर चलने वाली एक जोड़ी पैसेंजर ट्रेन की एक बोगी पार्सल बुकिंग से फुर्सत नहीं पाती थी। समय के करवट लेते ही रेल प्रशासन उक्त पैसेंजर ट्रेन को बंद कर माधोसिंह-रामबाग रेल खंड को आधुनिकीकरण में परिवर्तित करने के बाद न तो कंटेनर डिपो की ओर ध्यान दे पा रहा है न माधोसिंह-चिल्ह रेल खंड की खाली पड़ी जमीनों का संरक्षण कर सका है।
औद्यौगिक घरानों पर सवाल उठाने वालों ने कहा कि वर्तमान परिवेश में भदोही नगर, नईबाजार, सरोई, दुलमदासपुर, हरि रामपुर, माधोसिंह, घोसिया, खमरिया, गोपीगंज, जंगीगंज-छतमी, ऊंज, कुरमैचा, गोपपुर से प्रतिदिन 100 कंटेनर सामान उतरता और चढ़ता है। यदि यही सामान कंटेनर डिपो से होता रहता तो डिपो के शोपीस होने से बचाया जा सकता था।
कंटेनर डिपो पूर्वोत्तर रेलवे के अधीन होने के बाद भी कामकाज की जिम्मेदारी कानकोर निगम संभाल रहा है। कंटेनर डिपो को पुन: चालू कराने के लिए पत्र भेज दिया गया है। - अशोक कुमार, जनसंपर्क अधिकारी वाराणसी रेल मंडल
मात्र एक महीने में बंद हो गया कंटेनर डिपो
ज्ञानपुर। एक दशक पूर्व औद्योगिक घरानों की उठी आवाज को प्रमुखता से लेकर कानकोर निगम ने स्टेशन यार्ड से सटे माधोसिंह-चिल्ह रेल खंड की जमीन को चिह्नित कर निर्माण कराकर रेल प्रशासन को हैंडओवर भी कर दिया। पांच वर्ष पूर्व जब इसकी शुरूआत हुई तो दो रेल रैक उसी डिपो पर खड़ी कराकर उत्पाद की लोडिंग होने के बाद गुजरात, महाराष्ट्र बंदरगाहों के लिए रवाना हुई। चंद दिनों की सेवा के बाद से न रैक दिखी और न ही लोडिंग होने वाले सामान। डिपो का बंद गेट, परिसर के रखरखाव आदि के नाम पर मात्र खानापूर्ति हो रही है।
नियम सरलीकरण होने पर औद्योगिक घरानों का बढ़ेगा रुझान
प्रमुख कालीन निर्यातक हाजी यासर अराफात ने कहा कि रेल और कानकोर कंटेनर निगम नियमों का सरलीकरण कर औद्योगिक घरों का रुझान डिपो की ओर करा सकता है। डिपो को यह कहते हुए बंद किया गया है कि सामान उतनी मात्रा में नहीं मिल रहे हैं, जितना एक रैक में कंटेनर लगे हैं। महंगाई का सामना करते हुए औद्योगिक घराने अपने उत्पाद को बंदरगाह तक पहुंचा रहे हैं। यह सुविधा माधोसिंह कानकोर कंटेनर निगम की ओर से सरल होने पर उत्पादों की लोडिंग शुरू हो सकती है।
निर्यातक वेदप्रकाश गुप्ता ने बताया कि औद्योगिक क्षेत्र को बढ़ाना देने के उद्देश्य में केंद्र और प्रदेश सरकार आगे बढ़ी है। आगामी दिनों जिले में अंतरराष्ट्रीय स्तर का कालीन मेला भी एक्सपो मार्ट में लगेगा और कई नामचीन क्षेत्रों से आयातक-निर्यातक अपने उत्पादों का प्रदर्शन कर व्यापार के क्षेत्र में भाग्य आजमाएंगे। कालीन मेले से पूर्व रेल एवं कानकोर निगम माधोसिंह कंटेनर डिपो को गति देकर विश्व विख्यात कालीन, पीतल, मिट्टी के चमकीले उद्योग का मार्ग सरल होने में देर नहीं लगेगा।
व्यापारी गोविंद मुरारी ने माधोसिंह कंटेनर डिपो को चालू कराने के लिए प्रधानमंत्री तक पहुंचने का दावा किया। उन्होंने कहा कि औद्योगिक उत्पादों की लदाई-ढुलाई की सुविधा जब जिले में है तो उपेक्षा नहीं होने दी जाएगी। एक माह के अंदर प्रतिनिधिमंडल नईदिल्ली के लिए रवाना होगा।