दुर्गागंज। सुरियावां कोतवाली क्षेत्र के सागरपुर गांव में मंगलवार की शाम को खपरैल के मकान की दीवार गिरने से सोते समय एक वृद्ध की मौत हो गई। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची।
सागरपुर निवासी आल्हा बिंद (60) के चार बेटे हैं। इसमें तीन बाहर रहकर अपनी आजीविका चलाते हैं। गांव में आल्हा के अलावा उनकी पत्नी हीरावती देवी और 22 साल का बेटा जय लाल बिंद, उसकी पत्नी जीरा देवी और उनकी एक चार साल बेटी रहती है। गांव में एक खपरैल का कच्चा मकान और एक मड़ई में पूरा परिवार रहता है। मंगलवार की दोपहर आल्हा बिंद खपरैल के मकान में सोए थे। उनकी पत्नी और बहू बाहर काम कर रही थीं और पोती वहीं खेल रही थी। बेटा खेत पर काम करने गया था। इस बीच शाम लगभग चार बजे अचानक खपरैल के मकान की दीवार गिर गई। इससे आल्हा दब गए। वहीं काम कर रही पत्नी हीरावती ने शोर मचाया।
लोग मौके पर पहुंचे और दीवार के नीचे दबे आल्हा को बाहर निकाला और अस्पताल ले गए। चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मौके पर पहुंची ब्लॉक प्रमुख प्रियंका बिंद ने जिला प्रशासन से आर्थिक सहायता दिए जाने की मांग की। कहा कि परिवार को आर्थिक सहायता देने के साथ आवास का भी लाभ दिया जाए। सूचना के बाद पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
आवास के लिए किया था आवेदन, नहीं मिला लाभ
खपरैल का मकान 50 साल पुराना था। लोगों का कहना था कि यह हादसा अगर रात में होता था तो कई और जानें भी जा सकती थी। गांव के पूर्व प्रधान प्रतिनिधि कृष्ण कुमार बिंद ने बताया कि इनका खपरैल का मकान लगभग 50 साल पूराना था और जर्जर हो गया था। पंच वर्षीय में इन्होंने आवास के लिए आवेदन भी किया था, लेकिन लाभ नहीं मिल पाया।
इस साल इससे पहले हो चुकी है तीन की मौत
जिले में इसके पहले भी दीवार गिरने से मौत की घटनाएं हो चुकी हैं। इसी साल सात फरवरी को कोईरौना थाना क्षेत्र के बनकट उपरवार में दीवार गिरने से साइकिल से घर जा रहे दो सगे भाइयों की जान चली गई थी। 13 मार्च को भी ज्ञानपुर निवासी एक मजदूर की कच्ची दिवार गिरने से मौत हो गई थी। लोगों का कहना है कि अब भी कई पात्र आवास से वंचित हैं। कच्चे मकान में होने के कारण वे हादसे का शिकार हो जाते हैं।