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ब्लड बैंक से ओ और एबी पॉजिटिव ग्रुप नदारद

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कोरोना महामारी दिन प्रतिदिन लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है। इससे बचने के लिए सरकार और स्वास्थ्य विभाग की ओर से तमाम कवायद किया जा रहा है। फिर भी संक्रमण की रफ्तार थम नहीं रहा है। पहले आक्सीजन की कमी से लोग काल के गाल में समा रहे थे। अब ब्लड बैंक में खून की कमी से लोगों को परेशान होना पड़ रहा है।
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कोविड अस्पताल या निजी अस्पताल में पहले आक्सीजन की कमी के कारण मरीजों को परेशान होना पड़ रहा था। हालांकि जिला प्रशासन के प्रयास से आक्सीजन की समस्या दूर हो गई है। लेकिन अब जिले में ब्लड बैंकों में खून की कमी का मामला प्रकाश में आने लगा है। महाराजा चेत सिंह जिला अस्पताल में स्थित ब्लड बैंक में महज 11 यूनिट ब्लड बचा है। जिसमें ओ पॉजिटिव और एबी पॉजिटिव एक भी यूनिट खून नहीं है। केवल 11 यूनिट खून से किसी तरह काम चलाया जा रहा है। अब अगर शीघ्र ही रक्त का इंतजाम नहीं हुआ तो गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
100 यूनिट रक्त की क्षमता वाले ब्लड बैंक में मार्च माह में 44, अप्रैल में 23, मई में 11 यूनिट रक्त बचा है। आमतौर पर यहां सभी ग्रुप का ब्लड मिल जाता है। लेकिन इधर करीब एक माह से ग्रुप के रक्त की कमी हो गई है। कोरोना की वजह से रक्तदान करने वाले भी नहीं आ रहे हैं। जबकि प्रतिदिन दो से पांच यूनिट रक्त की मांग होती है। इस संबंध में ब्लड बैंक के प्रभारी डॉ. अतुल श्रीवास्तव ने बताया है कि कोरोना संक्रमण की वजह से रक्त देने वाले लोग नहीं आ रहे है जबकि रक्त की मांग ज्यादा है। डां अतुल ने बताया कि ज्यादा से ज्याद लोग रक्तदान करें तो ब्लड की कमी दूर हो सकती है और खून की कमी से मरने वाले लोगों की जान बचाई जा सकती है। कहा कि जो कोरोना पॉजिटिव थे, वे ठीक होने के छह सप्ताह बाद रक्तदान कर सकते हैं।
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किस ग्रुप का कितना बचा है रक्त
महाराजा चेतसिंह जिला अस्पताल में स्थित ब्लड बैंक में ए पॉजिटिव ग्रुप का आठ यूनिट ,ए निगेटिव ग्रुप का एक, बी पॉजिटिव का एक, जबकि एक अनटेस्ट है । वहीं ओ पॉजिटिव और एबी पॉजिटिव ग्रुप का एक भी यूनिट रक्त नहीं है।
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