ज्ञानपुर। मुख्यमंत्री सुमंगला योजना में आवेदन करने वाले अभिभावकों को अब जल्द लाभ मिलेगा। शासन के निर्देश पर बीडीओ और एसडीएम ही आवेदनों का सत्यापन करेंगे। उसके बाद बेटियों को लाभ मिल जाएगा। आवेदकों को अब अलग से शपथ पत्र भी नहीं देना होगा। कन्या भ्रूण हत्या और बाल विवाह जैसी कुरीतियों को रोकने के लिए प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना 2019 में लागू की। इसके तहत गरीब एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवार की बेटियों के लिए 15 हजार रुपये की आर्थिक मदद मुहैया कराई जाती है। बेटी के जन्म लेने से लेकर उच्च शिक्षा ग्रहण करने तक अलग-अलग छह श्रेणियों में प्रोत्साहन राशि देने की व्यवस्था की गई है। शुरुआत में आवेदन करने पर स्वास्थ्य, शिक्षा विभाग संग बीडीओ और एसडीएम की ओर से सत्यापन किया जाता था। नियमों की जटिलता के कारण ग्रामीण क्षेत्र की तमाम बेटियों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा था। समय पर सत्यापन न होने से बड़ी संख्या में आवेदनपत्र खारिज हो रहे थे। समस्याओं के मद्देनजर अब सरकार ने नियमों को सरल बना दिया है। पहले एसडीएम और बीडीओ के सत्यापन के पूर्व कक्षा एक, चार और छह के आवेदन पत्रों का बीईओ और कक्षा नौ एवं स्नातक के आवेदन पत्रों पर डीआईओएस के स्तर से दोहरे सत्यापन की व्यवस्था थी जिससे काफी दिक्कतें होती थी, लेकिन अब सिर्फ एसडीएम और बीडीओ की ओर से एक सत्यापन ही किया जाएगा। प्रत्येक श्रेणी में अलग-अलग आवेदन के बजाय अब एक बार लाभ स्वीकृत होने के बाद नई श्रेणी के लिए स्वत: फार्म अग्रसारित हो जाएगा। निर्धारित प्रारूप पर स्वहस्ताक्षरित घोषणा पत्र होने पर भी उन्हें पात्र माना जाएगा। इसी तरह श्रेणी एक में बालिका के जन्म के छह माह के अंदर और श्रेणी दो में टीकाकरण के बाद वाली प्रक्रिया को खत्म कर एक वर्ष के अंदर आवेदन को मान्य किया गया है। अन्य श्रेणियों में पूरे वित्तीय वर्ष में आवेदन करने की अनुमति प्रदान की गई है। पहले सिर्फ 30 सितंबर या प्रवेश लेने की अंतिम तिथि तक ही आवेदन किया जा सकता था। जिला प्रोबेशन अधिकारी शत्रुघ्न कन्नौजिया ने बताया कि एसडीएम और बीडीओ में किसी एक अधिकारी के सत्यापन से अभिभावकों को अधिक परेशानी नहीं होगी। जिले में मुख्यमंत्री सुमंगला योजना में सत्यापन के लिए 1892 आवेदन लंबित हैं। इसमें सबसे अधिक बीडीओ अभोली के यहां 220, एसडीएम भदोही के यहां 205, बीडीओ डीघ के यहां 284 और बीडीओ ज्ञानपुर के यहां 314 आवेदन शामिल हैं। जिला प्रोबेशन अधिकारी शत्रुघ्न सिंह ने बताया कि 2019 से शुरू हुई योजना में अब तक 11 हजार 212 पात्रों को अलग-अलग श्रेणी में लाभ दिया जा चुका है।