पानी न आने से सुखी ज्ञानपुर मुख्य नहर।
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ज्ञानपुर/ऊंज। गेहूं की फसल की पहली सिंचाई पर संकट खड़ा हो गया है। नहरों में पानी न आने से 10 हजार हेक्टेयर गेहूं की फसल की सिंचाई बाधित है। इसको लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है। विभागीय रोस्टर से नहर चालू होने तक फसल का विकास प्रभावित हो जाएगा।
जिले में 50 से 55 हजार हेक्टेयर में रबी की खेती की गई है। इसमें 44 हजार हेक्टेयर गेहूं जबकि 11 हजार हेक्टेयर में दलहनी, तिलहनी, आलू जैसी फैसल शामिल हैं। नहर और नलकूप किसानों की सिंचाई के मुख्य साधन है, लेकिन जिले में नहर के बेतरतीब रोस्टर से किसान न तो पलेवा कर पाते हैं और न ही गेहूं की सिंचाई। खाद, बीज, जुताई जैसी परेशानी से जूझते हुए किसी तरह बुआई करने वाले किसान अब सिंचाई के लिए चिंतित हो गए हैं। मुख्य नहर समेत माइनरें सूखी होने से उस पर आश्रित गेहूं की फसल प्रभावित होने लगी है।
रबी सीजन में ज्ञानपुर मुख्य नहर से पूर्वांचल के भदोही, इलाहाबाद, मिर्जापुर और वाराणसी जिलों के हजारों किसानों की 15237 हेक्टेयर (लगभग 62 हजार बीघे) कृषि भूमि की सिंचाई की जाती है। इसमें 10 हजार हेक्टेयर के आसपास रकबा अकेले भदोही जिले में है। गेहूं बुआई का सही समय 15 से 25 नवंबर तक माना जाता है। इसका संज्ञान प्रशासन और नहर विभाग को नहीं है। शायद यही वजह है कि अक्तूबर के दूसरे पखवारे से बंद हुईं नहरों में अब तक पानी नहीं छोड़ा गया है। जिससे सिंचाई बाधित हो गई है। नहर विभाग की माने तो 26 दिसंबर से नहर में पानी छोड़ा जाएगा। पुरानी नमी के दम पर जिन किसानों ने गेहूं की बुआई कर दी थी, वे भी सिंचाई को लेकर चिंतित हैं।
नहरों की साफ-सफाई के लिए दो महीने तक नहर को बंद किया जाता है। 26 दिसंबर को नहरों में पानी छोड़ा जाएगा। - वीके कुशवाहा, अधिशासी अभियंता नहर
गेहूं की बुआई 15 नवंबर से शुरू हो जाती है। 21 दिन बाद पहली सिंचाई की जानी चाहिए। ऐसे में ज्ञानपुर नहर परियोजना पर आश्रित किसानों को दिक्कत होती है। इस पर ध्यान देने की जरूरत है।- अशोक कुमार, कृषि अधिकारी