ज्ञानपुर। रबी सीजन में गेहूं की बुवाई की तैयारी शुरू हो गई है। मगर नहरों में पानी न आने से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें दिखने लगी हैं। जिले में नहरों का जाल बिछा है, फिर भी किसानों को समय पर सहूलियत नहीं मिल पा रही है। नहरों में गंदगी और झाड़ का अंबार लगा है। पानी का अता-पता नहीं है। गेहूं की बुवाई की खातिर खेत तैयार कराने के लिए किसान पलेवा करने की सोच रहे हैं।
जिले में लगभग 300 किमी छोटी-बड़ी नहरों का जाल फैला है। इससे करीब 10 से 15 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई की जाती है। धान की कटाई के बाद किसान गेहूं की बुवाई में लग गए हैं। धान काटने के बाद खेतों का पलेवा किया जा रहा है, लेकिन पूर्वांचल के किसानों की लाइफ लाइन कही जाने वाली ज्ञानपुर पंप नहर परियोजना से पानी की आपूर्ति नहीं की जा रही है। इससे नहरों के साथ ही माइनर भी सूख गए हैं। इससे निजी पंपिग सेट, राजकीय नलकूूपों के सहारे किसान पलेवा कर रहे हैं। जिन खेतों में सिर्फ नहर का पानी ही पहुंच सकता है, वे किसान परेशान हैं। किसानों ने आरोप लगाया कि नहर विभाग रबी सीजन में ही साफ-सफाई के नाम पर नहरों को बंद कर देता है। नवंबर और 15 दिसंबर तक बुवाई का सीजन है। लेकिन, नहरों को 25 दिसंबर से चालू किया जाएगा। सिंचाई के पानी के लिए कितनी भी शिकायत कीजिए, कोई अधिकारी और कर्मचारी किसानों की समस्याओं पर ध्यान नहीं देता। बारीपुर गांव के किसान राहुल दुबे, नारेपार के हंसराज सिंह, सरकार शुक्ल, जगदीप शुक्ल, डीघ के नंघू तिवारी, कला तुलसी के आदर्श पांडेय, भुर्रा के अवधराज सिंह, इटहरा के दीनानाथ मिश्र आदि किसानों ने जिलाधिकारी से नहरों को चालू कराने की मांग की। कहा कि जरूरत के वक्त नहरों में कभी भी पानी नहीं रहता। बताते चलें कि जिले में 53 हजार हेक्टेयर रकबे में रबी की खेती होगी। इसमें अकेले 49 हजार हेक्टेयर रकबे में गेहूं की बुवाई की जाएगी। पानी की समुचित व्यवस्था न होने से लक्ष्य पूर्ण हो पाना भी मुश्किल दिख रहा है।
अधिशासी अभियंता नहर विजय कुमार कुशवाहा ने कहा कि वर्तमान में पानी की मांग कम है। नहरों की साफ-सफाई के लिए उनका संचालन बंद है। रोस्टर के हिसाब से 25 दिसंबर को नहर चालू की जाएगी।