डायरिया की चपेट में आने वालों में मुकुंदा (45), शैलेंद्र (32), केशव (27), अशोक (38), आंचल (12), विमला (45), श्यामधर (47), सुमन (23) और अरुण (22) डायरिया से पीड़ित हैं। इन सभी का उपचार इलाके के ही एक अस्पताल में कराया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम पंचायत में पानी की तरह पैसा बहाया गया। लेकिन हैंडपंप से जल निकासी की व्यवस्था नहीं होने के कारण गंदा पानी आस पास इकट्ठा हो जाता है। इस वजह से हैंडपंप के नीचे का जलस्तर गंदे पानी के रिसने के कारण दूषित हो गया है। नतीजनत हैंडपंप से पानी निकालने पर गंदा पानी ही आता है। इस संबंध जिला कांग्रेस कमेटी के सचिव त्रिलोकीनाथ बिंद ने कहा कि ग्राम पंचायत के द्वारा यदि दूषित पेयजल की समस्या पर पहले ही ध्यान दिया गया होता तो आज इतने लोग बीमार नहीं होते। अभोली ब्लॉक के गंगारामपुर गांव में हाल ही में दूषित पेयजल पीने से नौ लोगों को डायरिया होने के बाद इस गांव केे ज्यादातर लोग भयभीत हो गए हैं। अब ज्यादातर लोग बोतल का पानी खरीदकर पी रहे हैं। गांव के अरुण कुमार का कहना है कि इस समय लोग इतने भयभीत हो गए हैं कि अब बाहर से पानी खरीद कर पीने को विवश हो रहे हैं घरों में एक तरफ दाल रोटी और जीविका चलाने के लिए परेशान हैं वहीं पानी की दूसरी बड़ी समस्या उत्पन्न हो गई है।