लालानगर। राष्ट्रीय राजमार्ग-19 पर गोपीगंज नगर में करोड़ों रुपये की लागत से पांच माह पहले आवागमन के लिए खोले गए ओवरब्रिज में अनदेखी का मामला तूल पकड़ लिया है। शुक्रवार को एनएचएआई अधिकारियों के साथ डीएम आर्यका अखौरी ने बैठक लेकर व्यापार मंडल के विरोध-प्रदर्शन पर जांच का निर्देश दिया। शनिवार को एनएचएआई ने मेंटनेस अधिकारी, टोलप्लाजा लालानगर के मैनेजर स्थलीय निरीक्षण कर रिपोर्ट मांगा है।
शुक्रवार को व्यापार मंडल ने बस स्टैंड के पास विरोध-प्रदर्शन कर आरोप लगाया था कि ओवरब्रिज निर्माण में डेढ़ सौ करोड़ रुपये खर्च कर दिया गया लेकिन जलनिकास की व्यवस्था दुरुस्त नहीं हुई। तीन दिनों से मानसून के गति पकड़ लेने के कारण ओवरब्रिज का पानी पाइप से न निकलकर झरने का रुप ले लिया है। इतना ही नहीं पूर्वी छोर झिलिया पुल, पश्चिमी छोर गिराई तक लगभग पौने दो किलोमीटर का ओवरब्रिज टपक रहा है। ऊपर से गुजरने वाले बड़े वाहनों का पहिया जमे पानी को सीधे तीन-चार मंजिले मकानों में रहने वालों तक पहुंचा रहा है। मानक की अनदेखी कर लगी पाइपें गत माह से कहीं दुकानदार तो कहीं नीचे से आवागमन करने वालों का कपड़ा खराब करता है। उत्तरी-दक्षिणी लेन के सर्विस रोड के दोनों ओर बने नाला अधूरे पड़े हैं। मुख्य नाला में जुड़ाव न होने से बारिश और लोगों के घरों का गंदा पानी राजमार्ग की ओर रुख करना बड़ी लापरवाही का संकेत है। पूर्व के दिनों में उठी आवाज पर न एनएचएआई कदम बढ़ाया न कार्यदाई संस्था। प्रतिदिन हजारों रुपये का डीजल-पेट्रोल पेट्रोलिंग के नाम पर खर्च कर मेंटनेस कर्मचारी खानापूर्ति करते हैं। निरीक्षण करने पहुंचे मेंटेनेस अधिकारी वीरेंद्र कुशवाहा ने कहा कि ओवरब्रिज पर जलजमाव और जाम नाला की रिपोर्ट परियोजना निदेशक को भेज दी गई है। इस मौके पर आलोक रावत, श्रीकांत जायसवाल, नवीन शर्मा, आलोक जायसवाल आदि भी रहे।