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वंशीपुर मर्डर में नया मोड़, हत्या की धारा हटी

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वंशीपुर मर्डर में नया मोड़, हत्या की धारा हटी
डरवश पत्नी ने पुराने प्रेमी और कुछ लोगों का नाम बताया
पीएम रिपोर्ट में आत्महत्या की पुष्टि, आरोपी पत्नी गिरफ्तार
संवाद न्यूज एजेंसी
ज्ञानपुर। कोतवाली क्षेत्र के वंशीपुर गांव में रविवार की सुबह राजित लाल की हत्या के मामले में नाटकीय मोड़ आ गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आत्महत्या की पुष्टि हुई। मृतक की पत्नी के खिलाफ दर्ज हत्या की धारा हटाते हुए उसे न्यायालय भेजा गया।
सोमवार को पुलिस लाइन में पत्रकारों से रूबरू होकर एसपी रामबदन सिंह ने घटना का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि रविवार की सुबह वंशीपुर में राजितलाल उर्फ पंडित की उसकी पत्नी सीता देवी ने सहयोगियों के साथ मिलकर हत्या करने की सूचना मिली। मृतक के पिता की तहरीर पर पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। आरोपी सीता ने पूछताछ में पहले मर्चवार के बेनी, राजू, झक्कर के नाम बताए। पूछताछ में उनकी संलिप्तता नहीं मिली। उसके बाद आरोपी ने अपने मायके के लाल दूबे, छटंकी दूबे, दल्लू दूबे, अखिलेश दूबे के साथ मिलकर घटना को अंजाम देने की बात कही गई। जिसमें उसका एक पुराना प्रेमी भी शामिल रहा। मौके पर पुलिस और स्वाट टीम की ओर से जांच की गई तो उनकी भी संलिप्तता नहीं मिली। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आत्महत्या की पुष्टि हुई।
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कड़ाई से आरोपी सीता से पूछताछ की गई तो उसने बताया कि 15 फरवरी की शाम सात बजे खाना बनाने को लेकर विवाद हुआ और मारपीट भी हुई। उसके बाद मै खेत में चली गई। वहां से लौटकर आने पर देखा तो पति साड़ी के फंदे से फांसी लगा लिए थे। घटना से मैं काफी डर गई थी। मेरे सास-ससुर हत्या के पीछे मेरा ही हाथ मान रहे थे। एसपी ने कहा कि अब तक की विवेचना में आत्महत्या की बात प्रमाणित हुई। उसकी पत्नी ने आत्महत्या के लिए प्रेरित किया। जिससे धारा 302 को हटाकर 306 में परिवर्तित किया गया। गिरफ्तारी टीम में निरीक्षक राम कुमार यादव, शेराफुल हसन और महिला कांस्टेबल ललिता यादव शामिल रहीं।
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मासूमों को देख पिघल गई खाकी!
ज्ञानपुर। कोतवाली क्षेत्र के वंशीपुर गांव में युवक की मौत के मामले में 24 घंटे के अंदर हत्यारोपी पत्नी सीता के खिलाफ दर्ज मुकदमे के परिवर्तित होने को लेकर तरह-तरह की चर्चा रही। जानकारों का मानना है कि मृतक राजित लाल के दो बेटे अमन और गुड्डू और एक बेटी अमृता हैं। जिनकी उम्र एक से पांच साल के बीच है। बच्चों के सिर से पहले ही पिता का साया उठ गया है। ऐसे में अगर उसकी मां सीता जेल चली जाएगी तो उनकी देखभाल कौन करेगा। बच्चों का भविष्य पूरी तरह अंधकारमय हो जाता।
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