रविवार की सुबह दुलमदासपुर सर्रोई स्थित मदरसा इस्लामिया अरबिया में इस्लाहे फिक्रो अमल कान्फ्रेंस में मौलाना अब्दुस्समद जेयाई ने कही।
मौलाना ने बताया कि नबी करीम सल्ल. को अल्लाह ने दुनिया के लिए रहमत बनाकर भेजा। आपने तब लोगों को इंसानियत का पाठ पढ़ाया जब चारों तरफ अराजकता का माहौल था।
भूखे प्यासे रह कर भी मोहब्बत का पैगाम दिया। कहा इस्लाम की बुनियाद मानवता पर आधारित है। इसलिए यहां किए जाने वाले सभी कार्यों में नेकनीयती जरूरी है।
एक वाकया सुनाते हुए मौलाना ने बताया कि एक बूढ़ी औरत हर रोज नबी करीम सल्ल. के रास्ते में कूड़ा फेंकती थी, लेकिन वह उससे कभी नाराज नहीं हुए।
एक दिन जब उस औरत ने कूड़ा नहीं फेंका तो उन्होंने मालूम किया कि आज उस औरत ने कूड़ा क्यों नहीं फेंका। इस पर बताया गया कि आज वह बीमार है तो वे उसे देखने पहुंच गए और उसे दुआओं से नवाजा।
कान्फ्रेंस में छात्रों के बीच नाते पाक और तकरीर का मुकाबला हुआ। मुकाबले में ढाई दर्जन बच्चों ने हिस्सा लिया।
प्रिंसपल अकमल रजा ने बताया की केरत में हाफिज सफ़ीर प्रथम रहे, जबकि नातेपाक में आतिफ प्रथम, मोहसिन रजा दूसरे और साकिब रजा तीसरे स्थान पर रहे।
अंग्रेजी में तकरीर करने के लिए तस्लीम रजा व साजिद रजा जबकि उर्दू में तहसीन रजा और अरबी में इस्लामुद्दीन को पुरस्कृत किया गया।
निजामत में अब्दुल माबूद रजा प्रथम व आमिर रजा दूसरे स्थान पर रहे। सैयारा कमर, शाहिद रजा, अकरम झिंगुरपुर, मो. ईसा, डॉ. कैस, हाफिज नसीम अख्तर आदि ने नातेपाक का नजराना पेश किया। तौकीर अहमद, अब्दुल हई, अब्दुल जलील, अख्तर अली, शमीम अंसारी, जाबिर बाबू अंसारी, खुर्शीद डायर, सादिक बाबू, कलीम अंसारी, वारिस अली, निजामुद्दीन, मास्टर इलियास, मंजूर इलाही आदि मौजूद रहे।