सीतामढ़ी के बारीपुर बलुआ गंगा घाट पर तैरते हुए पहुंची जलपरी श्रद्धा शुक्ला।
जलपरी श्रद्धा शुक्ला ने कहा कि तैराकी में देश को ओलंपिक में स्वर्ण पदक दिलाना मेरा लक्ष्य है। कानपुर से जिस मिशन को पूरा करने के लिए निकली हूं, उसको पूरा करने पर ध्यान केंद्रित है। धार्मिक स्थली से सटे बारीपुर के बलुआ गंगा घाट पर शनिवार को अमर उजाला से खास बातचीत में श्रद्धा ने अपनी बात बेबाकी से रखी।
आत्मविश्वास से लबरेज श्रद्धा ने कहा कि उसकी निगाहें धनुर्धर अर्जुन की तरह सिर्फ अपने लक्ष्य पर हैं। उसने डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माता विनोद कापड़ी के आरोपों को खारिज करते हुए श्रद्धा और उसके पिता ललित शुक्ला ने कहा कि उन्होंने श्रद्धा पर डाक्यूमेंट्री फिल्म बनाने की पेशकश की, जिसे नकार दिया गया। उसी की खीझ निकालने के लिए बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं। उन आरोपों से मैं विचलित होने वाली नहीं हूं। उन्होंेने कहा कि उसके दादा मुन्नू लाल ढाई वर्ष की उम्र से ही तैराकी की कला सिखा रहे हैं, अब वह 13 वर्ष की हो गई है। उसका लक्ष्य तैराकी में देश का प्रतिनिधित्व करना और स्वर्ण पदक जीत कर देश का नाम रोशन करना है। उसने बताया कि पानी के संक्रमण से बचने के लिए हर 10 घंटे पर शरीर पर एक लेप लगाने के लिए नाव पर आती हूं। श्रद्धा के पिता ललित शुक्ला ने आरोप लगाया डॉक्यूमेंट्री बनाने की इजाजत न देने पर उन्होंने धमकी दी कि उनका पैसा और समय खराब हुआ है, मैं तुम्हे बदनाम कर दूंगा और मिशन को पूरा नहीं होने दूंगा। कहा कि बेटी का मिशन पूरा होने पर उचित कार्रवाई पर विचार विमर्श करूंगा।