पितृ अमावस्या पर बुधवार को गंगा घाटों पर तर्पण करने के लिए एक लाख से अधिक लोग पहुंचे। भीड़ के चलते गंगा घाट लोगों से खचाखच भरे रहे। हाईवे से गंगा की तरफ जाने वाले मार्ग पर लोगों की भीड़ दिखी। बाइक, साइकिल और चार पहिया से लोग अपने पितरों का तर्पण करने पहुंचे। विधि विधान पूर्वक श्राद्ध कर नमन किया। रामपुर घाट जाने वाले मार्ग पर भीड़ के दबाव के चलते जाम लग गया। सीतामढ़ी और रामपुर घाट पर सबसे ज्यादा भीड़ रही।
आश्विन मास के पितृपक्ष की अमावस्या पर पितृ विसर्जन किया जाता है। अपने पूर्वजों का तर्पण करने और उनका आशीर्वाद लेने और मंगलमय जीवन की कामना को लेकर गंगा घाटों पर भारी भीड़ उमड़ी। रामपुर घाट पर भोर से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आवागमन शुरू हो गया था। सुबह दस बजे तक ही घाट पिंडदान करने वालों से खचाखच भर गया था। बड़ी संख्या में पुरोहितों के द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार से पिंडदान कराया गया।
क्षौर कर्म कराने के बाद लोगों ने अपने पितरों को तर्पण किया। जौ का आटा, खोवा, चावल, काला तिल, मिठाई आदि पदार्थों के साथ पिंदडदान करके पूजा अर्चना की गई। वैदिक मंत्रोच्चार से पूरा घाट गुंजायमान रहा। नदियों के किनारे पिंडदान करने का विशेष महात्म्य होने के कारण जिले भर के गंगा घाटों पर भारी भीड़ रही। क्षेत्र के भोगांव, सीतामढ़ी घाट, बेरासपुर, पंचमुखी घाट, गुलौरी घाट, जहांगीराबाद, डेरवां, अरई आदि गंगा घाटों पर भी पिंडदान करने वालों की भीड़ रही।
बेरासपुर घाट पर पं. लक्ष्मीशंकर तिवारी ने विधि विधान से पिंडदान कराया। रामपुर घाट पर खचाखच भीड़ थी। इसके चलते बड़े वाहनों का प्रवेश नहीं हो पा रहा था। पिंडदान करने के बाद श्रद्धालुओं ने लाई, चूड़ा, गट्टा, बंडा, केला सहित जलेबी, समोसा, पकौड़ी, लौंगलता आदि की खरीदारी भी की। बड़ी संख्या में घरेलू सामानों की भी दुकानें लगाई गई थीं।