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19 हजार के सापेक्ष 11 हजार से अधिक आवेदन मिले अपात्र

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ज्ञानपुर। तहसील, ब्लॉक और शिक्षा विभाग के अफसरों की उदासीनता से जिले की साढ़े तीन हजार बेटियां मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना का लाभ नहीं पा सकीं। आलम यह है कि आवेदन करने वाले 19 हजार आवेदनों में से 60 फीसदी आवेदक अपात्र मिले हैं। नौ माह में मात्र चार हजार पात्रों को लाभ दिया गया है। बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार ने मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना लागू की है। इसमें बालिकाओं को जन्म से लेकर पढ़ाई तक कुल छह चरणों में 15 हजार रुपये से लाभान्वित करने का प्रावधान है। सितंबर 2019 में शुरू हुई मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के लिए पहले ऑफलाइन और बाद में ऑनलाइन आवेदन मांगा गया है। दो माह में करीब 18 हजार 899 आवेदन आए। शुरुआती दौर में अफसरों की उदासीनता के कारण बेटियों को लाभ नहीं मिला। डीएम की सख्ती के बाद सत्यापन शुरू हुआ तो अलग-अलग चरणों में तीन हजार 946 बालिकाओं को लाभ दिया गया। हालांकि अब भी तीन हजार 829 आवेदन अफसरों के टेबल पर धूल फांक रहे हैं। तीनों तहसील, सभी छह ब्लॉक, खंड शिक्षा अधिकारियों के दफ्तर में लंबित आवेदन का सत्यापन न होने से सुमंगला के लाभ से साढे़ तीन हजार बेटियां वंचित रह गईं। विभागीय आंकड़ों पर गौर किया जाए तो वित्तीय वर्ष 2019-20 में आए कुल 18 हजार 899 आवेदनों में 11 हजार से अधिक अपात्र मिले। 3946 पात्र बेटियों के खाते में 65 लाख भेजा गया। वित्तीय वर्ष 2020-21 में अब तक एक हजार से अधिक आवेदन आए। जिलाधिकारी राजेंद्र प्रसाद ने सभी अधिकारियों को सख्त हिदायत दी है कि लंबित आवेदनों का निस्तारण करें, जिससे बेटियों को लाभान्वित किया जा सके।
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