प्रयागराज, मिर्जापुर और भदोही जिले के सीमावर्ती गंगा घाटों पर नि:शुल्क स्टीमर संचालन की स्थिति काफी खतरनाक है। यहां स्टीमर में क्षमता से अधिक लोगों को बैठाकर गंगा को पार कराया जाता है। इससे हादसे की आशंका बनी हुई है। बावजूद इसके न विभाग ओवरलोड स्टीमर यात्रा पर रोक लगाने के नाम पर जिम्मेदार मौन हैं। पूर्व के दिनों में गंगा घाटों पर हो चुकी घटनाओं को संज्ञान में लेकर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आने वाले समय में दो दिन पूर्व की हुई घटना की पुनरावृत्ति से इनकार भी नहीं किया जा सकता। रविवार को कुछ ऐसा ही मामला भदोही-प्रयागराज के सीमावर्ती गंगा घाट टेला पर देखने को मिला, जो जन-जन के लिए सिर्फ सोचने के लिए विवश करता रहा। प्रयागराज जिले में पड़ने वाले मेजा, मांडा, चिलबिला, मदरा आदि स्थानों पर हुई रिश्तेदार के यहां जा रहे सोनपुर-कटरा के लालू यादव, कोइरौना के आरबी यादव, मोन-कुटिया के दिनेश यादव ने बताया कि गंगा में आई बाढ़ के कारण लगभग एक माह तक स्टीमर का संचालन बंद कर दिया गया था। संचालन शुरू होने पर नैनी पुल पहुंच कर लगभग 60 किलोमीटर की यात्रा से राहत पाने के लिए बाइक, साइकिल और पैदल ही लोग अति करीबी टेला घाट से गंगा आर-पार होते हैं। दिन में लगभग 10 चक्कर एक-दूसरे गंगा घाट का चक्कर लगाने वाले स्टीमर संचालकों की मनमानी उस समय बड़ी अनहोनी को बढ़ावा देती है जब मानक का उल्लंघन कर क्षमता से अधिक लोगों को स्टीमर में बैठाया जाता है। भदोही जिले की सीमा में पड़ने वाले रामपुर, डेंगूरपुर-धनतुलसी घाट और मिर्जापुर प्रखंड के सीमाढ़ी-मिश्रपुर घाट की स्थिति कुछ ऐसी ही है। अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग मुजिब अहमद ने बताया कि टेंडर के समय मानक की अनदेखी न होने, घाट मार्ग के दुरुस्तीकरण और स्टीमरों के रखरखाव की जिम्मेदारी निभाने वाले ठेकेदारों को वरीयता दी जाती है। सीमावर्ती गंगा घाटों पर होने वाली मनमानी की शिकायत मिलने पर रिपोर्ट मुख्य अभियंता को भेजी जा चुकी है।