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कागज में निगरानी समिति, जिले में नहीं है जल पुलिस

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ज्ञानपुर। कोरोना संक्रमण काल में गंगा में बहते शव के अंतिम संस्कार के लिए जिले में निगरानी समिति का गठन भले हो गया है, लेकिन अब तक एक शव का संस्कार नहीं हो सका। सिर्फ कागजों में निगरानी समितियां चल रही हैं। जल पुलिस के न रहने से पेट्रोलिंग भी नहीं हो पा रही है। ऐसे में मुख्यमंत्री के आदेशों का पालन कराना प्रशासन के लिए चुनौती है।
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कोरोना की दूसरी लहर में मरने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। अब तक जिले में 110 से अधिक संक्रमितों की जान जा चुकी है। ज्यादातर परिवार वाले संक्रमित मरीजों का अंतिम संस्कार कर देते हैं, लेकिन कई लोग गंगा में ही शव बहा देते हैं। प्रयागराज सहित अन्य जिलों में बहाए गए नौ से अधिक शव अब तक जिले के रामपुर सहित अन्य गंगा घाटों पर दिख चुके हें। गंगा का जल दूषित न हो और मृतकों का सम्मानजनक संस्कार करने के लिए शासन की ओर से पांच हजार आर्थिक सहायता देने के साथ ही निगरानी समिति का गठन करने का निर्देश दिया गया है। जिले में संबंधित गांव के ग्राम पंचायत अधिकारी और एडीओ के नेतृत्व में निगरानी समिति का गठन किया गया है, लेकिन समिति में शामिल अधिकारी अब तक गंगा घाटों पर ही नहीं पहुंचा। दो दिन पूर्व रामपुर गंगा घाट पर मिले दो शव पानी में बह गए और कोई अधिकारी नहीं पहुंचा। यह तो एक बानगी है। पांच दिन पूर्व गंगा में मिले छह शव का भी संस्कार नहीं हो सका। जिले में जल पुलिस के न होने से पेट्रोलिंग भी नहीं हो पा रही है। इस संबंध में मुख्य विकास अधिकारी भानु प्रताप सिंह ने कहा कि गंगा में मिलने वाले शव के अंतिम संस्कार के लिए निगरानी समिति गठित है। अगर समितियां काम नहीं कर रही हैं तो उन पर कार्रवाई होगी।
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