ज्ञानपुर। धनतेरस से पांच दिवसीय दीपोत्सव का आगाज हो गया। इस मौके पर लक्ष्मी की खूब कृपा बरसी और करोड़ों का कारोबार हुआ। शुभ मुहूर्त में खरीदारी के लिए लोगों में भरपूर उत्साह दिखा। बर्तन, कपड़ा, आभूषण, इलेक्ट्रानिक सामान और वाहनों की जमकर खरीद हुई। पूरे दिन बाजार में भीड़ बनी रही। पांच सौ से अधिक बाइकों और कारों की बिक्री के साथ ऑटोमोबाइल सेक्टर ने जहां फर्राटा भरा। वहीं आगामी सहालग के सीजन के मद्देनजर सराफा बाजार दीपोत्सव की रोशनी से जगमग हो गया। सराफा, ऑटोमोबाइल के अलावा इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़े, बरतन और मूर्तियों के बाजार में लगभग दो सौ करोड़ का कारोबार हुआ। हालांकि इस बार बाजार पर कोरोना का असर भी देखा गया। पिछले वर्ष धनतेरस पर ढाई सौ करोड़ से अधिक का कारोबार हुआ था।
धनतेरस की तैयारी ने कोरोना से डगमगाए बाजार के अर्थशास्त्र में नई जान फूंक दी। सराफा को छोड़कर ज्यादातर बाजार धनतेरस पर मालामाल हो गए। ज्ञानपुर, भदोही, गोपीगंज समेत तमाम प्रमुख बाजारों में सुबह से लेकर देर रात तक खरीदारी हुई। इलेक्ट्रॉनिक्स, बर्तन, ज्वेलरी बाजार के अलावा ऑटोमोबाइल्स शोरूम पर भीड़ रही। सराफा कारोबार को धनतेरस पर थोड़ी राहत मिली। एक अनुमान के मुताबिक जिले में सराफा कारोबार 20 करोड़ से अधिक का हुआ है। हालांकि पिछले वर्ष के मुकाबले यह काफी कम माना जा रहा है। स्वर्णकार समाज सेवा समिति के अध्यक्ष रामरक्षा सेठ के मुताबिक पिछले वर्ष धनतेरस पर सराफा कारोबार 50 करोड़ से अधिक हुआ था, इस बार लगभग 40 से 45 फीसदी ही रहा। ऑटोमोबाइल सेक्टर में इस धनतेरस पर बूम आ गया। धनतेरस के निमित्त पांच सौ से अधिक बाइकें बुक कराई गईं थीं, लेकिन बिक्री लगभग सात सौ बाइकों की हुईं। इससे शोरूम संचालकों की बांछें खिल गईं।
धनंजय बजाज के मालिक अशोक गुप्ता ने कहा कि 50 बाइकें धनतेरस के लिए बुक कराईं गईं थीं, जिनकी बिक्री हुई। कुछ बाइकें इससे इतर भी बिकीं। इसके पीछे ऑफर और तत्काल फाइनेंस सुविधा ने अहम भूमिका निभाई। इसी तरह इलेक्ट्रॉनिक्स, बर्तन, मूर्तियां और कपड़े आदि के बाजार में भी देर रात तक रौनक रही। इलेक्ट्रॉनिक आइटमों में एलईडी, वाशिंग मशीन, गीजर, झालर आदि की सबसे ज्यादा बिक्री हुई। इसके अलावा मोबाइल फोन भी खूब खरीदे गए।
विक्टोरिया सिक्के 950 के रेट से बिके
सराफा बाजार में इस धनतेरस विक्टोरिया सिक्के खूब मांग में रहे। हालांकि इस बार नकली सिक्के बाजार में उतरने की भी चर्चा रही। इससे जहां खरीदार इसको लेकर सतर्क दिखे, वहीं कारोबारियों के सामने इस समस्या से निपटने की चुनौती भी थी। चांदी के लक्ष्मी-गणेेश और साधारण सिक्के भी आठ सौ से नौ सौ रुपये के बीच बिके। सराफा कारोबार अशोक पाठक ने बताया कि विक्टोरिया सिक्के 950 के रेट से बिके। इसके अलावा चांदी के नोट, पायल, बिछिया और चांदी के अन्य सामान लोगों ने दिवाली गिफ्ट के लिए जमकर खरीदे।
मध्यम वर्ग की पसंद बने स्टील के बर्तन
ज्ञानपुर। पिछले कई दिनों से तैयार हो रहा बर्तन का बाजार धनतेरस के दिन चमक गया। सामान्य दिनों में दुकान के अंदर बर्तन का कारोबार करने वाले व्यवसायियों ने बृहस्पतिवार को बाहर अस्थायी दुकानें सजा ली थीं, जहां सुबह से लेकर देर रात तक खरीदारी का दौर चला। स्टील का बर्तन ज्यादातर लोगों की पसंद बने थे। धनतेरस पर बर्तन की खरीदारी शुभ मानी जाती है, इसलिए ज्यादातर मध्यम और निम्न मध्यमवर्ग से जुड़े लोग स्टील के बर्तनों को तरजीह दे रहे थे। हालांकि पीतल और कांसे के बर्तन भी खरीदे जा रहे थे। बर्तन व्यवसायी मूलचंद्र ने बताया कि इस बार धनतेरस और दिवाली पर 80 से 85 प्रतिशत कारोबार होने की उम्मीद है।