भदोही। इस्लामी कैलेंडर के पहले महीने मोहर्रम के चांद की तस्दीक बुधवार को हो गया। लोगों ने मंगलवार को ही चांद की उम्मीद लगाई थी, लेकिन चांद की तस्दीक नहीं हो सकी थी। मोहर्रम की दसवीं तारीख यानि 29 जुलाई को यौमे आशूरा मनाया जाएगा। उसी दिन ताजियों का जुलूस निकाल कर कर्बला ले जाकर दफनाया जाएगा। लोगों ने एक दूसरे को नए साल की बधाई देकर नए साल की खुशी जताई। इस्लाम का आखिरी महीना बकरीद और पहला महीना मोहर्रम बलिदान का माना जाता है। नए साल की बधाई के दौर के बीच नगर के विभिन्न ताजियादारों ने इमाम चौकों की साफ-सफाई और रंगाई पुताई शुरू कर दी। बुधवार की शाम अकीदतमंदों ने अपने अपने मोहल्ले के इमाम चौकों पर अगरबत्ती भी जला दी।
नए साल की बधाईयों के बीच मदरसा शमसिया तेगिया के प्रिंसिपल मौ.फैसल अशर्फी ने कहा कि पहला महीना अपने में कई फजीलतें समेटे हुए है। यह कई मायने में इसलाम के उसूलों की याद दिलाता है, जो गलत राह पर हैं। उन्हें सही राह दिखाता है। बताया कि दसवीं यौमे आशूरा के दिन हजरत मोहम्मद सल्ल. के नवासे हजरत इमाम हुसैन की शहादत को कोई कैसे भुला सकता है। उन्हीं की शहादत को याद करते हुए लाखों करोड़ों लोग वर्षों से ताजिया निकालते हैं। मौलाना ने कहा कि मोहर्रम में बैंड बाजा न बजाकर केवल इबादत में वक्त बिताना चाहिए। कहा अगर शहीदाने कर्बला को खिराजे अकीदत पेश करना है तो दसवीं के दिन रोजा रखें, इबादत में वक्त बिताएं और हजरत इमाम हुसैन की शहादत की जानकारी और लोगों को दें। अकीदतमंद मुसलमानों ने मंगलवार को ही चांद देखने का प्रयास किया लेकिन नहीं दिखा। इस बीच बुधवार को चांद की तस्दीक हो गई और बधाई का दौर शुरू हो गया।