ज्ञानपुर। जिले में स्वच्छ भारत मिशन को बड़ा झटका लगा है। एक सप्ताह की बारिश और जलभराव से करीब 10 हजार से अधिक शौचालय निष्प्रयोज्य हो गए। धांधली और गड़बड़ी से पहले ही विवादों में रहे मिशन का अब दीवाला निकाल दिया। इसके पीछे ग्राम प्रधान और सेक्रेटरी की मनमानी भी रही। आनन-फानन में खेत-खलिहान में ही शौचालय बनाए गए जो अब दो से तीन फीट पानी में डूबे हैं।
स्वच्छ भारत मिशन का मकसद भी अच्छा है। इसे प्रभावी बनाने के प्रयास भी खूब हुए। परिणाम भी कुछ सकारात्मक रहा, लेकिन ग्राम प्रधानों और सेक्रेटरी की मनमानी ने सरकार के मिशन को शुरूआती झटका दिया। चार साल में करीब दो लाख से अधिक शौचालय का निर्माण हुआ लेकिन 20 से 25 फीसदी शौचालय चंद दिनों में ही बेकार हो गए। जिले की 561 ग्रामसभाओं को साल भर पूर्व ओडीएफ तो बना दिया गया लेकिन व्यवस्था में खास बदलाव नहीं हुआ। पिछले दिनों एक सप्ताह तक हुई बारिश ने रही सही कसर को पूरी कर दी। अभोली के सरावां, डीघ के बिगहिया, नारेपार समेत गंगा और वरूणा से सटे गावों के 90 फीसदी शौचालय खराब हो गए हैं जबकि अन्य ग्रामसभाओं में निचले हिस्सों में बने शौचालय भी पानी में डूबकर बेकार हो गए। बताते चलें कि स्वच्छ भारत मिशन में अब तक करीब 200 करोड़ से अधिक रकम खर्च हो चुका है लेकिन व्यवस्था में न के बराबर बदलाव हुआ।
2.35 लाख शौचालय बने
ज्ञानपुर। 2012 के बेस लाइन सर्वे के अनुसार जिले में दो लाख 39 हजार शौचालय बनने थे, जिनमें 66 हजार शौचालय पूर्व के माने गए। जिले की 561 ग्राम पंचायतों में 2012 से लेकर 2018 तक जिले में एक लाख 75 हजार शौचालय का निर्माण किया गया। उसके बाद 36 हजार शौचालय दूसरे चरण में बने। तीसरे चण में 21 हजार शौचालयो का निर्माण चल रहा है। स्वच्छता मिशन के जिला समन्वयक सरोज पांडेय ने कहा कि स्वच्छता मिशन के लिए सभी को जागरूक होने की जरूरत है। गोष्ठी, बैठकों के माध्यम से गांव-गांव में लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
ज्ञानपुर। अभोली के सरावां की गुड्डी देवी ने बताया कि उनका शौचालय खेत में बनाया गया था। बारिश में वह तीन फीट तक डूब गया है। जिससे अब वह प्रयोग लायक नहीं बचा है। इसी तरह ज्ञानपुर से सटे चकटोडर गांव की मुसहर बस्ती में बने कई शौचालय पानी में डूब गए। इसी तरह कई गावों में शौचालय पानी में डूबकर बेकार हो गए।