ज्ञानपुर। शासन की प्राथमिकताओं में शामिल मिनी सचिवालय और सामुदायिक शौचालय अपूर्ण मिलने एवं संचालित न होने पर पूर्व एवं वर्तमान प्रधान और सचिव की जिम्मेदारी तय होगी। पंचायत राज विभाग की ओर से 546 ग्राम पंचायतों में बनने वाले पंचायत भवनों और शौचालयों का सत्यापन किया जाएगा। बृहस्पतिवार को गठित टीमों ने अलग-अलग ग्राम पंचायतों का निरीक्षण किया। इसमें कई गांवों में सचिवालय और शौचालय की हालत ठीक न मिलने पर डीपीआरओ ने नाराजगी जताई। पंचायत भवन और सामुुदायिक शौचालय शासन की 100 दिन की कार्ययोजना में शामिल है, लेकिन कई सचिव और प्रधान उदासीन बने हैं। वेतन रोकने से लेकर नोटिस भेजने के बाद भी बड़ी संख्या में शौचालय और पंचायत भवन क्रियाशील नहीं है। डीपीआरओ राकेश कुमार यादव ने सत्यापन के लिए एडीपीआरओ अभयराज सिंह, डीसी सरोज पांडेय सहित अलग-अलग छह सदस्यों की टीम बनाई है। बृहस्पतिवार को डीपीआरओ ने सदौपुर, डीसी स्वच्छता ने हरदुआ संग अन्य सदस्यों ने अलग-अलग पांच से छह ग्राम पंचायतों की जांच की। इसमें 10 से 12 गावों में स्थिति ठीक नहीं मिली। डीपीआरओ ने बताया कि जिन ग्राम पंचायतों में शौचालय या पंचायत भवन क्रियाशील नहीं है वहां के वर्तमान एवं पूर्व प्रधान और सचिव की जिम्मेदारी तय की जाएगी। पैसा खर्च होने के बाद भी काम पूर्ण न होना गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर संबंधित के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया जाएगा। बताते चलें कि जिले की 546 ग्राम पंचायतों में 150 में पंचायत भवन और शौचालयों की हालत ठीक नहीं है।