ज्ञानपुर। सूबे की बहुचर्चित 69 हजार शिक्षक भर्ती घोटाले में आरोपी कोइरौना के बारीपुर गांव निवासी मायापति का मायाजाल अंतत: टूट गया। तीन साल में करीब छह बार प्रयागराज एसटीएफ उसे गिरफ्तार नहीं की सकी, लेकिन बुधवार को कोइरौना पुलिस उसे पकड़ने में सफल हो गई। 2020 में मुकदमा दर्ज होने के बाद मास्टरमाइंड सहित कई आरोपी गिरफ्तार हो गए थे, लेकिन मायापति लगातार चकमा दे रहा था। मखमली कालीनों के लिए विश्व प्रसिद्ध कालीन नगरी किसी न किसी कारनामे को लेकर सुर्खियों में रहा है। साल 2020 में शिक्षक भर्ती घोटाले में बारीपुर निवासी रूद्रपति दूबे और उसके भाई मायापति का नाम सामने आया। मामला हाईप्रोफाइल होने से शासन ने जांच एसटीएफ को सौंप दिया। उसके बाद सभी के खिलाफ गैंगेस्टर का मुकदमा दर्ज हुआ। रूद्रपति सहित अन्य आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया गया था, जबकि मायापति पुलिस के हाथ नहीं लग रहा था। 2020 से लेकर 2022 तक करीब तीन साल तक छह से सात बार एसटीएफ की टीम कोइरौना के बारीपुर पहुंची, लेकिन वह हाथ नहीं लगा। बुधवार की सुबह मुखबीर की सूचना पर कोइरौना पुलिस ने उसे दबोचने में कामयाब रही।
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मायापति के हाथ थी पूर्वांचल की कमान
ज्ञानपुर। मायापति का पूर्वांचल के बड़े-बड़े शिक्षण संस्थानों से संपर्क रहा। वह शिक्षा माफियाओं से सीधे संपर्क कर परीक्षाओं में उत्तीर्ण करने का ठेका लेता था, हालांकि घोटाले में नाम आने के बाद मामला ठंडा हो गया। जिसके बाद लगातार वह एसटीएफ के रडार पर रहा। जिले में भी कई अभ्यर्थी उक्त परीक्षा में उत्तीर्ण हुए थे। इसमें से करीब 30 ऐसे अभ्यर्थी हैं जिनके तार सीधे मायापति दुबे से जुड़े हैं।
ज्ञानपुर। कोइरौना के बारीपुर में आज भी शिक्षा माफियाओं का दरबार लगता है। मायापति के भाई रूद्रपति को एसटीएफ ने गिरफ्तार किया था, लेकिन कोर्ट से उसे राहत मिल गई थी। जिससे वह बारीपुर में ही रहता था। मायापति की गिरफ्तारी से इस पर रोक लग सकती है।
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बारीपुर में लगता है दरबार, दूसरी भर्तियों की भी सांठगांठ
ज्ञानपुर। कोइरौना के बारीपुर में आज भी शिक्षा माफियाओं का दरबार लगता है। मायापति के भाई रूद्रपति को एसटीएफ ने गिरफ्तार किया था, लेकिन कोर्ट से उसे राहत मिल गई थी। जिससे वह बारीपुर में ही रहता था। मायापति की गिरफ्तारी न होने से पूर्व की तरह गोरखधंधा चल रहा था। मायापति की गिरफ्तारी से इस पर रोक लग सकती है।