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Bhadohi News: सुहागिन महिलाओं ने सीता केश वाटिका का किया सोलह शृंगार

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सीतामढ़ी में शुक्रवार को नाै दिवसीय लव-कुश जन्मोत्सव नवमी मेले का समापन हुआ। मेले में अंतिम दिन श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। महिलाओं ने अक्षयवट (सीता वट) की पूजन कर अक्षय पुण्य की कामना की।
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सुहागिनों ने सीता समाहित स्थल मंदिर के पास स्थित मां सीता केश वाटिका का सोलह शृंगार कर पूजन किया। मान्यता है कि सीता केश वाटिका का श्रृंगार पूजन करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। मेले में सुरक्षा के मद्देनजर जगह-जगह पुलिसकर्मी तैनात रहे। सीसीटीवी से मेले की निगरानी की गई।
नवमी मेला में शुक्रवार की भोर से ही श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला शुरू हो गया था। आस्थावानों ने गंगा में डुबकी लगाने के बाद महर्षि वाल्मीकि आश्रम के प्राचीन मंदिर में लव और कुश के दर्शन किए। इसके बाद मेले का लुत्फ उठाया।
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खानपान और खिलाैने की दुकानें पर भीड़ रही। सौंदर्य प्रसाधन और चाट की दुकानों पर महिलाओं की भीड़ रही। महिलाओं ने घरेलू सामान और बच्चों ने खिलौने की खूब खरीददारी की। जलेबी, चोटहिया जलेबी, गुरहिया जलेबी, अनरसा, मिठाई की खूब बिक्री हुई।
मेले में पूर्वांचल के जिलाें से लोग आए थे। मुख्य मेला महर्षि वाल्मीकि आश्रम परिसर में रहा। सीता समाहित स्थल मंदिर, मौनीबाबा आश्रम, उड़िया बाबा आश्रम, बाबा धवासानाथ आश्रम में भी श्रद्धालुओं ने दर्शन पूजन किया। गंगा तट से भगवान हनुमान जी मंदिर गेट से सीता समाहित स्थल मंदिर तक जाम की स्थिति रही।
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कोइरौना थाना से मंदिर तक लगभग दो किमी तक लगे जाम को छुड़ाने में पुलिसकर्मियों के पसीने छूट गए।
मान्यता है कि भगवान श्री राम एवं माता सीता के सुपुत्र लव और कुश का जन्म महर्षि वाल्मीकि आश्रम सीतामढ़ी में हुआ था।
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