ज्ञानपुर। चैत्र नवरात्र को लेकर बाजार सग गए हैं। दुकानें मां की चुनरी, नारियल, पूजा सामग्री से गुलजार हो गईं हैं। मंगलवार से शुरू होने वाले नवरात्र को लेकर खरीदारी शुरू कर दी गई है। इससे बाजारों में चहल-पहल बढ़ गई है। शाम होते ही पूजा सामग्री खरीदने के लिए दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ होने लगी है। वहीं देवी मंदिरों पर नवरात्र को लेकर तैयारी तेज है। मंदिर पर साफ सफाई और रंग रोग का कार्य चल रहा है।
नवरात्र की रौनक घरों में ही नहीं, बल्कि मंदिरों और बाजार में भी देखी जा सकती है। नवरात्र की पूजा व व्रत विधि-विधान से करने पर मां दुर्गा प्रसन्न होकर भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। नवरात्रि नौ अप्रैल से शुरू हो रहे हैं। कलश स्थापना इसी दिन सुबह की जाएगी। मान्यता है कि अगर भक्त संकल्प लेकर नवरात्र में अखंड ज्योति प्रज्वलित करें और उसे पूरी भावना और मन से जलाएं रखे तो देवी प्रसन्न होती हैं और उसकी सभी मनोकामना पूर्ण करती हैं। ज्ञानपुर, गोपीगंज, भदोही, सुरियावां समेत अन्य बाजारों में पूजा सामग्री की दुकानें भी सज चुकी हैं। पूजा के लिए कलश, नारियल, चुनरी, रोली, पान, घी, धूप बत्ती, अगरबत्ती, लोंग, सुपारी, कपूर सहित पूजा में इस्तेमाल होने वाली सभी सामग्री खरीद रहे हैं। नौ दिन के व्रत में अन्न से परहेज किया जाता है, इसलिए बाजार में कुट्टू, फल, व्रत के अन्य सामानों की भी दुकानें सज गई है। दुकानदार उमेश, रमेश, दीपक मोदनवाल ने बताया कि दुकानों पर नवरात्र को लेकर ग्राहकों की भीड़ बढ़ी है। नवरात्र को लेकर बाजार में रौनक है, रात में भी पूजा सामग्री के स्टाॅक बनाए जा रहे हैं, जिसे दिन में सीधे ग्राहकों को दिया जाता है।
नवरात्र को लेकर गोपीगंज, सीतामढ़ी, हरिहरनाथ मंदिर, बालीपुर, दुर्गागंज त्रिमुहानी, कस्तुरीपुर, जंगीगंज सहित दर्जनों देवी मंदिरों पर तैयारी शुरू है। जहां सुबह-शाम साफ सफाई और रंग रोगन का कार्य तेजी से चल रहा है। सीतामढ़ी, घोपइला देवी धाम, हरिहरनाथ स्थित मां काली और दुर्गा मंदिर के अलावा अन्य देवी मंदिरों पर नवरात्र को लेकर तैयारी शुरू है।
सोमवती अमावस्या आठ को
ज्ञानपुर। काशी से प्रकाशित श्री महावीर पंचांग के अनुसार सोमवती अमावस्या आठ अप्रैल को है। डुहिया भावसिंहपुर निवासी आचार्य दीनानाथ शुक्ल ने बताया कि इस अमावस्या को महिलाएं अचल सुहाग की कामना करती है, इसके लिए पीपल वृक्ष का विधि-विधान से पूजन अर्चन करती हैं। इसके अलावा पीपल वृक्ष का 108 बार परिक्रमा करती हैं। इससे उन्हें अति सौभाग्य तथा सुख की प्राप्ति होती है। सुबह ही स्नान ध्यान कर महिलाएं पूजन अर्चन करने पीपल वृक्ष तर पहुंचती हैं।