नगर पंचायत बनने के 35 साल बाद भी सुरियावां नगर राजस्व विभाग के नक्शे में गांव के रूप में दर्ज है। इलाके में बिजली, सड़क और पानी के इंतजाम तो नगर की तर्ज पर किए जाते हैं, लेकिन जमीन आदि से जुड़े मामलों में ग्राम पंचायत के आधार पर निर्णय लिए जाते हैं। इससे नगर के लोग असमंजस की स्थिति में हैं। उन्हें जमीन आदि के मसलों के लिए भदोही तहसील का चक्कर लगाना पड़ता हैऔर परेशानी होती है।
तकरीबन 35 साल से नगर पंचायत के रूप में आबाद व्यावसायिक नगरी सुरियावां की समूची जमीन अभिलेखों में अब तक ग्राम सभा के रूप में दर्ज है। नगर पंचायत के नाम पर सारे कामकाज निपटाए जा रहे हैं, लेकिन नगर के लोग अब तक गांव और नगर के बीच उलझे हुए हैं। 20 हजार की आबादी वाले नगर के निवासियों को आय, जाति, निवास आदि प्रमाण पत्रों पर भी नगर का नाम नहीं दिया जाताऔर इन्हे बनवाने के लिए भ्ादोही जाना पड़ता है।
सुरियावां नगर क्षेत्र की कागजों पर अब भी पट्टी जोरावर सिंह और पट्टी रामअचल सिंह ग्राम पंचायत के नाम से पहचान कायम है। जनपद के पश्चिमी छोर पर स्थित सुरियावां नगर की जमीन पर करीब 100 साल पूर्व दो राजाओं के नाम पर पट्टी जोरावर सिंह और पट्टी राम अचल सिंह गांव आबाद थे। लगभग 35 साल पूर्व दोनों ग्रामसभाओं के स्थान पर सुरियावां नगर पंचायत का गठन किया गया। नगर पंचायत के गठन के बाद नगर पंचायत अध्यक्ष और सभासद का चुनाव होने लगा।
इससे यहां के निवासियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस संबध में नगर निवासी राजेश कुमार ने कहा कि दोहरी व्यवस्था से कागजात बनवाने में लोगों को दिक्कत होती है। संजय मोदनवाल ने कहा कि नगर पंचायत और ग्रामसभा के चलते कई विकास कार्य नहीं हो पा रहे हैं। सुरेश कुमार ने कहा कि राजस्व विभाग के लोग जान बूझकर अभिलेखों को दुरुस्त नहीं करा रहे हैं। इससे मनमानी पट्टा करने का काम चल रहा है।