तेजी से बदलते समय के साथ सबकुछ हाईटेक होता जा रहा है। अब गांवों में भी डिजिटल इंडिया की बयार बहने लगी है। पढ़ा-लिखा, ईमानदार व्यक्तित्व अगर नेतृत्व की जिम्मेदारी संभालता है तो वह क्षेत्र और जनपद के विकास की बात करने लगा है। ऐसे में विकल्पों की कमी नहीं है। हमें प्रत्याशी चयन से लेकर राजनीति में सुधार तक अपने विवेक का इस्तेमाल करना चाहिए। जनप्रतिनिधि चयन में लोगों के सुख-दुख में शरीक होनेवाले और न्यायप्रिय व्यक्ति को प्राथमिकता देनी चाहिए।
रविवार को अमर उजाला की ओर से पर्यटनस्थली सीतामढ़ी में आयोजित मंथन कार्यक्रम में डॉक्टर, इंजीनियर, व्यवसायी समेत प्रबुद्ध वर्ग के तमाम लोगों ने बेबाकी से बात रखी। कहा कि उदारीकरण के दौर में दुनिया तेजी से बदल रही है। लेकिन, प्रतिस्पर्धा भी कम नहीं है। देश की तरक्की के लिए पढ़े-लिखे, राष्ट्रप्रेम की भावना से ओत प्रोत ईमानदार राजनेता को ही चुनना चाहिए।
डॉ. राकेश कुमार मिश्र ने कहा कि बिना औद्योगिक विकास के चहुंमुखी विकास की बात बेमानी है। ऐसा प्रतिनिधि होना चाहिए, जो जनपद में उद्योग धंधे के लिए अनुकूल माहौल पैदा करने में भूमिका निभाए। मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराए और सर्वांगीण विकास के लिए कार्य करे।
मदनपुर निवासी रिटायर्ड इंजीनियर विद्याशंकर शुक्ल का कहना है कि मौजूदा राजनीतिक परिवेश संकीर्ण विचारधारा का शिकार होता जा रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने की जरूरत है। इसके लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति की मजबूती बेहद जरूरी है। शिक्षित समाज से ही राष्ट्र का विकास संभव है।
सुभाष पांडेय कहते हैं कि जनता के तमाम दु:ख दर्द को समझने वाला और विकास की सोच रखने वाला ऊर्जावान जनप्रतिनिधि मेरी पहली पसंद है। जिले को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाले व्यक्ति का नेतृत्व जनता को गौरवान्वित करता है।
डॉ. सौरभ शुक्ल का कहना है कि हमें ऐसे जनप्रतिनिधि को मौका देना चाहिए, जो सर्वांगीण विकास कराने वाला हो। जनपद में मेडिकल कॉलेज की जरूरत है ताकि जिले के होनहार छात्रों को भटकना न पड़े। साथ ही मेडिकल एजुकेशन की फीस कम होनी चाहिए। उच्च स्तरीय हॉस्पिटल की स्थापना हो तो बात बने।
बिजनस मैन जे. के. पांडेय कहते है कि हम ऐसे जनप्रतिनिधि का पक्षधर हूँ जो लघु उद्योग को बढ़ावा देने वाला हो जिससे बेरोजगारी व पलायन की समस्या से निजात मिलेगी। लघु उद्योगों के स्थापना से जनपद में विकास के नए मार्ग प्रसस्त होंगे। शिक्षा और शिक्षार्थियों की भलाई के लिए तकनीकी शिक्षण संस्थाओं की स्थापना कराने वाला हो।
इंजीनियर राजेश पुंढीर का कहना है कि कालीन नगरी में उच्च स्तरीय इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेज होना चाहिए। यह कार्य बिना मजबूत राजनीतिक पहल के संभव नहीं है। ऐसे में जनप्रतिनिधि के चुनाव में ध्यान देना चाहिए की विकास कार्य कौन करा सकता है, उसे ही चुनें।
- बुद्धिजीवी रविशंकर पांडेय कहते हैं कि क्षेत्र का विकास होगा, तभी जनपद का विकास होगा। जनप्रतिनिधि उसे चुनें, जो सर्व समाज के सर्वांगीण विकास की सोच रखने वाला हो। मैं उस जनप्रतिनिधि के लिए मतदान करने के लिए लोगों को भी प्रेरित करुंगा, जो विकास कार्यों को कराने में अग्रिम पंक्ति में होगा।
उद्यमी पीके उपाध्याय ने कहा कि व्यावसायिक विकास के लिए राजनीतिक पहल जरूरी है। जिले के बुनियादी व्यवसाय भी कमजोर होते जा रहे हैं। इस ओर राजनीतिक संजीदगी दिखाने की जरूरत है। प्रत्याशी चयन में इसका खास ध्यान रखने की जरूरत है। हालांकि अब वोटर जागरूक हो गया है।
- डॉ. लालप्रताप सिंह का कहना है कि ईमानदार और पढ़े लिखे प्रतिनिधि का चुनाव कर उसे विधानसभा में भेजना चाहिए। ताकि राजनीति का उच्च मानदंड कायम रहे। यही समय की मांग है। योग्य जनप्रतिनिधि ही क्षेत्र का समुचित प्रतिनिधित्व कर सकता है।
बेचन पांडेय ने कहा कि राजनीति में भ्रष्टाचार और अपराध के लिए जगह नहीं होनी चाहिए। अब समय आ गया है कि जागरूक जनता अपने उस जनप्रतिनिधि चुनाव करना चाहिए जो पुरुषार्थी हो और गरीबी , बेरोजगारी को दूर करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सके और नि: स्वार्थ भाव से लोगो की सेवा करे।
शिक्षक राजधर मिश्रा ऐसे जनप्रतिनिधि के पक्षधर हैं जो आधुनिक भारत के निर्माण में योगदान करने का विचार धारा रखता हो और तकनीकी व रोजगार शिक्षा के उन्नयन के लिए प्रयास करे ताकि बेरोजगारी पर काबू पाया जा सके।
योग शिक्षक संजय कुमार शास्त्री का विचार है कि जो जनप्रतिनिधि क्षेत्र का विकास बिना भेदभाव के कराए, उसे ही नेतृत्व का हक है। क्षेत्र, जाति की भावना से ऊपर उठकर केवल विकास की बात की जानी चाहिए। किसानों के विकास और उनकी समस्याओं को दूर करने की दिल में सोच रखता हो।