सीतामढ़ी में लवकुश जन्मोत्सव के दिन गंगा घाट पर लगी स्नानार्थियों की भीड़।
धार्मिक स्थली सीतामढ़ी में बुधवार को लवकुश कुमारों के जन्मोत्सव की धूम रही। इस उपलक्ष्य में आयोजित नौ दिवसीय राष्ट्रीय रामायण नवमी मेले के अंतिम दिन आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने गंगा में पुण्य की डुबकी लगाई और जगत जननी मां सीता समेत अन्य मंदिरों पर पूजा अर्चना की। मेलार्थियों ने मेले में झूले, सर्कश और मौत का कुआं आदि का आनंद लिया। महिलाओं और बच्चों ने जमकर खरीदारी की। चाट-पकौड़ी और जलेबी की दूकानों पर पूरे दिन लोगों की भीड़ जमा रही। नौ दिनों तक भक्तिरस में सराबोर रही धार्मिक नगरी में अंतिम दिन हजारों श्रद्धालुओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए धार्मिक मेले का आनंद उठाया। नवमी मेले में तड़के सुबह से ही लोगों का आना शुरू हो गया, जो शाम तक जारी रहा। हजारों आस्थावानों ने गंगा में डुबकी लगाकर बिभिन्न मंदिरों में दर्शन पूजन कर दान पुण्य किया और मेले का लुत्फ उठाया। भीड़ की स्थिति यह रही कि 11 बजे तक सीतामढ़ी तक जाने वाली सभी सड़कें, पगडंडियां, चकरोड मेलार्थियों से खचाखच भर गए।
मेले में जगह-जगह व्यंजन, सर्कस, झूला, एयर झूला, मौत का कुआं, चाट फुलकी, की दुकानों पर लोगों की भीड़ दिखी। बच्चों ने जहां झूले का आनंद लिया, वहीं महिलाओं ने घरेलू और सौंदर्य प्रसाधन के सामान की खरीदारी की। मेले में सुरक्षा के चाक चौबंद इंतजाम किए गए थे।
गंगा घाट, महर्षि वाल्मीकि आश्रम, सीता समाहित स्थल, सीताधाम मौनी बाबा आश्रम, संत उड़िया बाबा आश्रम, बाबा धवासानाथ आश्रम मेलार्थियों की भीड़ से पैक रहे। जगह-जगह पुलिस के जवान चक्रमण करते रहे।