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Bhadohi News: हत्या मामले में दो दोषियों को आजीवन कारावास

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ज्ञानपुर। जिला एवं सत्र न्यायाधीश बिजेंद्र शैलत की अदालत ने शनिवार को हत्या के मामले में दो दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। सात साल पहले भदोही के मर्दनपुर गांव में हुई घटना में कोर्ट ने फैसला सुनाया। बिंदेश्वरी यादव निवासी मर्दनपुर थाना भदोही ने बताया था कि वरुणा नदी पर शिव बालक और राजकुमार उर्फ बुद्धू ने मछली मारने के लिए बाड़ लगाया था। अक्सर शिकायत करते कि मर्दनपुर के लड़के बाड़ लगाकर मछली मारकर ले जाते। लड़कों को मना करो नहीं तो जान से मार दूंगा। 12 अक्तूबर 2016 को उनका लड़का शशि प्रकाश सुबह 10 बजे घर से निकला। आरोप लगाया कि उसे शिव बालक और राजकुमार ने मारकर नदी में फेंक दिया। उसकी लाश मिली थी। मामले में पुलिस ने दोनों के खिलाफ आरोपपत्र न्यायालय में भेजा। कोर्ट में दोनों पक्षों के बयान दर्ज हुए। तर्कों को सुनने के बाद न्यायाधीश बिजेंद्र शैलत की अदालत ने दोषी शिव बालक और राजकुमार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष से बहस-पैरवी जिला शासकीय अधिवक्ता दिनेश चंद्र पांडेय ने की।
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ज्ञानपुर। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पाक्सो की अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म और अपहरण के दोषी को 20 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई। 30 अप्रैल 2021 को एक व्यक्ति ने तहरीर देकर आरोप लगाया था कि उसकी नाबालिग बेटी को अजय कुमार यादव निवासी घनश्यामपुर बहला-फुसलाकर कहीं ले गया। काफी पता करने पर जानकारी नहीं हो सकी। मामले में आरोपी के खिलाफ पुलिस ने दुष्कर्म सहित विभिन्न धाराओं में आरोपपत्र न्यायालय में भेजा। गवाहों के बयान और दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद न्यायाधीश श्रीमती मधु डोंगरा की अदालत ने दोषी अजय कुमार यादव को 20 साल सश्रम कारावास और 33 हजार अर्थदंड की सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष से बहस-पैरवी डॉ. अश्वनी मिश्र ने की।
ज्ञानपुर। महिलाओं संग होने वाली दुष्कर्म की घटना को लेकर एडीजे सुबोध सिंह ने तल्ख टिप्पणी की है। शुक्रवार को दुष्कर्म के एक मामले में सजा सुनाते हुए उन्होंने फैसले में लिखा। कहा कि दुष्कर्म का अपराध केवल नारी के शरीर के विरुद्ध नहीं, बल्कि उसके मन और आत्मा के खिलाफ भी होता है। इसकी शिकार महिला के मन पर जो चोट पहुंचती है, उससे वह जीवन भर मुक्त नहीं हो पाती। समाज में उसका और उसके परिवार का सामान्य जीवन जीना कठिन हो जाता है।
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ज्ञानपुर कोतवाली क्षेत्र के एक गांव निवासी महिला ने बताया था कि उसकी शादी 2013 में हुई थी। उसको बच्चा नहीं पैदा हो रहा था। जब भी गर्भ रहता बच्चा गिर जाता। इसको लेकर ससुराल वाले पिटाई करते। उसके ससुर ने 29 जुलाई 2018 को कहा कि देवी माता सपने में आई थी और कहा कि महिला को बच्चा उसके पति से नहीं, मुझसे पैदा होगा। पति ने भी जबरन उसे ससुर के कमरे में बंद कर दिया। ससुर ने उसके साथ दुष्कर्म किया। इसमें दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए गए। महिला चिकित्सक के बयान में पीड़िता के शरीर व शरीर के निचले हिस्से में भी चोट आने की बात कही गई थी। सुनवाई के दौरान शासकीय अधिवक्ता पंकज तिवारी ने रामचरित मानस की चौपाई का जिक्र किया। अनुज वधू भगिनी सुत नारी, सुनु सठ कन्या सम ए चारी। इनहीं कुदृष्टि बिलोकई जोई, ताहिं बधे कछु पाप न होई। कहा कि इस व्यक्ति ने पुत्री समान पुत्रवधू संग दुष्कर्म कर पूरे समाज के विरुद्ध अपराध किया है। इसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई जाए। अदालत ने दोनों पक्षों का तर्क सुनने के बाद ससुर को 14 साल और पति को 10 साल कारावास की सजा सुनाई।
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