शहरनामा की खबर: नियामताबाद के ददवा पर गांव में कोल उद्योग मजदूर संघ चंदासी के संस्थापक अध्यक्ष
चंदौली। विकास भवन के समीप शुक्रवार को भाकपा (माले), किसान महासभा, आरवाईए, खेग्रामस तथा एपवा की ओर से धरना प्रदर्शन किया गया।
इसमें गरीबों की बेदखली रोकने के साथ जमीन उपलब्ध कराने की मांग की। इस दौरान भाकपा (माले) के जिला सचिव अनिल पासवान ने कहा कि भारतमाला परियोजना के तहत रेवसा गांव में किए गए भूमि अधिग्रहण तथा तीनों दलित बस्तियों में निवास करने वाले गरीब भूमिहीनों को अभी तक जमीन का पट्टा तथा आवास देकर पुनर्वासित नहीं किया गया।
जबकि प्रभावित लोग 15 जून से ही भाकपा (माले) के नेतृत्व में रेवसा बस्ती बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले अनिश्चितकालीन धरने के माध्यम से अपनी मांग को लगातार उठाते चले आ रहे हैं।
जिला प्रशासन अगल-बगल काम बढ़ाता जा रहा है। जिससे बस्ती में निवास करने वाले लोगों को प्रदूषण की वजह से सांस लेना मुश्किल हो गया है। कहा कि जब तक रेवसा गांव के दलित गरीबों को जमीन तथा आवास देकर पुनर्वासित नहीं किया जाता, बस्ती के अगल-बगल कार्य करने पर रोक लगाई जाए। अखिल भारतीय किसान महासभा जिलाध्यक्ष कामरेड श्रवण मौर्य ने कहा कि सरकार फ्रेट विलेज तथा बंदरगाह के विस्तारीकरण के नाम पर तथागत बुद्ध विहार ट्रस्ट, आदिशक्ति लोना माता मंदिर ट्रस्ट तथा मिल्कीपुर, ताहीरपुर के दलित गरीबों किसानों की जमीनों तथा उनके घरों को उजाड़ने में जिला प्रशासन लगा हुआ है।
इससे इलाके में बड़े पैमाने पर आक्रोश बढ़ता जा रहा है। उन्होंने पूरे जिले में विभिन्न परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण के दौरान भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के मुताबिक मुआवजे समेत प्रभावित लोगों को तमाम सुविधाएं देकर पुनर्वास की गारंटी किया जाना चाहिए।