उधवामाफी के शक्तिवन में पौधों को पानी देतीं प्रधानाध्यापिका उर्मिला देवी। संवाद
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ज्ञानपुर। वैसे तो हर साल लाखों पौधे लगाकर हरियाली को बढ़ावा दिया जाता है लेकिन देखरेख के अभाव में सैकड़ों पौधे सूख जाते हैं। इस बार मानसून की बेरुखी ने पौधों पर बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। ऐसे में पौधों को इस संकट से उबारने के लिए एक सार्थक प्रयास शुरू किया है सम्हाई भटनी की प्रभारी प्रधानाध्यापक उर्मिला देवी ने। पौधों को बचाने के लिए वह प्रतिदिन कार से पानी ढोती हैं ताकि पौधों की जान बची रहे। जिला प्रशासन ने बच्चों व आमजन की मदद से उधवामाफी में शक्ति वन की स्थापना कराई है। वहां करीब 500 से ज्यादा पौधे लगाए गए हैं, लेकिन पानी के अभाव में पौधे सूख रहे हैं। पौधों को मुरझाते देख उर्मिला से रहा नहीं गया और उन्होंने पौधों को बचाने का संकल्प ले लिया। प्रतिदिन स्कूल से छुट्टी होने के बाद अपनी कार में स्कूल के हैंडपंप या सबमर्सिबल पंप से दो-तीन बड़े डिब्बों में पानी भरती हैं। उस पानी को कार में रखकर करीब डेढ़ किलोमीटर दूर शक्ति बन में ले जाकर पौधों को सींचती हैं। बताती हैं कि करीब 100 पौधे उनके स्कूल के बच्चों ने भी लगाए हैं। ऐसे में और पौधों को बचाना उनकी खुद की जिम्मेदारी है। कहा कि इस समय बारिश नहीं हो रही है कुछ दिन की बात है। बारिश हो जाएगी तो पौधे संभल जाएंगे। प्रतिदिन ग्रामीणों व स्कूल के शिक्षकों की मदद से कार में 50-60 लीटर पानी लादकर ले जाती हैं। वहां पौधे सींचे जाते हैं। उनके प्रयास को देख अब ग्रामीण भी आगे आ रहे हैं। मन में यदि कुछ करने का जज्बा हो तो कठिन से कठिन काम भी हो सकता है। यह सच कर दिखाया है सुरियावां के कृष्णा यादव ने। वह अपने इलाके के उन पौधों के लिए डॉक्टर हैं जो पौधे छोटे होते हैं, और किसी कारण से टूट जाते हैं। पौधों को रस्सी के सहारे बांधते हैं। इससे पौधे ठीक हो जाते हैं। साथ ही प्रमुख कार्यक्रमों में पहुंचते हैं तो अपने साथ पौधे लिए रहते हैं। उन्हें उपहार के तौर पर देते हैं। कहते हैं कि एक-एक पौधा भी यदि हर व्यक्ति लगाए तो पर्यावरण को काफी मजबूती मिलेगी।