जिले में मनरेगा के कामों में भ्रष्टाचार चरम पर है। औराई ब्लॉक के मेंदनीपुर, बाबूसराय, गिर्दबड़गांव और कंसापुर में बिना काम कराए ही कार्यदायी संस्था को लाखों का भुगतान कर दिया गया है। गौर करने वाली बात है कि मेंदनीपुर में अमृत सरोवर का कार्य करीब 90 फीसदी तक अधूरा है। अमृत सरोवर के किनारे इंटरलॉकिंग की ईटें बिखर चुकी हैं। अमृत सरोवर में धूल उड़ रहा है। घाट का निर्माण भी नहीं हुआ है।अन्य कार्य भी अधूरे हैं। इसके बाद भी संस्था को चार बार में 5 लाख 96 हजार 448 रुपये का भुगतान कर दिया गया। कार्यदायी संस्था को लाल ईटों के नाम पर भी भुगतान हो रहा है, जबकि ईंट किसी भट्ठे से ली जानी चाहिए।
जिले में मनरेगा के तहत कई विकासपरक कार्य कराए जाते हैं। कार्यों में पारदर्शिता हो, इसके लिए ऑनलाइन प्रणाली शुरू की गई। लेकिन भ्रष्टाचार के लिए जिम्मेदार रास्ते तलाश लिए हैं। बीते दिनों औराई के कंसापुर गांव में फर्जी एफटीओ (फंड ट्रांसफर ऑर्डर) बनाकर अधूरे 300 मीटर भूमिगत नाले के लिए पांच लाख 30 हजार रुपये बनारस की फर्म को भुगतान करने का मामला सामने आया था। अब अन्य गांवों में भी यही खेल हो रहा है। ब्लॉक के अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से गांवों में विकास कार्यों के पैसे मनमाने ढंग से कार्यदायी संस्था को भुगतान कर दिया जा रहा है। औराई ब्लॉक के ही गिर्दबड़ागांव में करीब 200 भूमिगत नाली निर्माण के नाम पर तीन लाख 20 हजार रुपये का भुगतान किया गया है। बाबूसराय में इंटरलाॅकिंग के लिए एक लाख 62 हजार 756 रुपये का भुगतान किया गया है। यहां इंटरलॉकिंग नहीं हुई है। कंसापुर के प्रधान शिवशंकर जायसवाल ने लाखों के गोलमाल की शिकायत जिलाधिकारी विशाल सिंह से की है। उन्होंने ब्लॉक में तैनात एक कर्मचारी पर गंभीर आरोप लगाया है। कहा कि ब्लॉककर्मी ने फर्जी एफटीओ तैयार कर अपनी चहेती फर्म को बिना किसी के हस्ताक्षर से ही भुगतान कर दिया है। उन्होंने इस प्रकरण की गंभीरता से जांच कराने की मांग की है।