ऊंज। क्षेत्र के सोबरी गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में बुधवार को कथावाचक आचार्य पंडित दयाशंकर महाराज ने विंध्य क्षेत्र, कुंती स्तुति, भीष्म स्तुति सहित सुखदेव के आगमन की कथा सुनाई।
कहा कि जब महाभारत का युद्ध समाप्त होने के बाद भगवान कृष्ण अपने घर जाने लगे। उनकी बुआ कुंती कृष्ण के पैर पड़कर रोने लगीं। कृष्ण ने कहा कि तुम हमारे कुल की पुत्री हो, तुमको हमें प्रणाम नहीं करना चाहिए। कुंती ने कहा कि माधव तुमको देखकर ही मैं अब तक संतुष्ट रहा करती थी। यही प्रार्थना है कि हमेशा दर्शन देते रहिए। श्री कृष्ण पांडवों को लेकर भीष्म पितामह से मिलने के लिए उनकी सरसैया के पास गए, जहां भीष्म ने कृष्ण से कहा माधव मैं अपनी पुत्री की शादी आप से करना चाहता हूं। कृष्ण चकित हो गए, कहा आप तो बाल ब्रह्मचारी हैं, आपको कहां पुत्री प्राप्त है। उन्होंने कहा हमारी जो कुमति रूपी पुत्री है उसी को मैं आपको अर्पित करता हूं। भगवान कृष्ण ने कहा कि आप की मति कुमति नहीं है। आप हमारे परम भक्त हैं। पूरा जीवन आदर्श और मानव कल्याण के लिए जिया है। आपके मोक्ष की कामना करता हूं। इस मौके पर बृजभूषण शुक्ला, शशि भूषण शुक्ला, परमेश्वरी देवी, गायत्री देवी, अजय तिवारी आदि मौजूद रहे।