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कौशन विकास मिशन: साढे तीन हजार की निखरी जिंदगी

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ज्ञानपुर। कौशल विकास मिशन के माध्यम से बेरोजगारों को रोजगार मुहैया कराने की मुहिम धरातल पर उम्मीद के हिसाब से आगे नहीं बढ़ पा रही। करीब पांच साल में साढ़े पांच हजार युवाओं ने अलग-अलग ट्रेड में प्रशिक्षण हासिल किया, लेकिन साढ़े तीन हजार युवा ही रोजगार से जुड़ सके। किसी को प्राइवेट कंपनी में नौकरी मिली तो किसी ने बैंक से ऋण लेकर स्वरोजगार शुरू कर दिया। जबकि दो हजार बेरोजगार प्रशिक्षण के बाद भी रोजगार की तलाश में भटक रहे हैं।
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बेरोजगारों को रोजगार लायक बनाने के लिए सूबे में पूर्ववर्ती सपा सरकार से ही उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन योजना चलाई गई। केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री कौशल विकास मिशन योजना चली, जबकि 2017 में सूबे में भाजपा की सरकार बनने पर पं. दीनदयाल उपाध्याय कौशल विकाश मिशन योजना लागू की गई। तीनों योजनाओं में अभ्यर्थियों को हेल्थ केयर, डाटा एंट्री ऑपरेटर, इलेक्ट्रिकल, हैंड एंब्रॉयडरी, आईसीटी, सिलाई मशीन आपरेटर, गारमेंट इन लाइन चेकर, बैंकिंग काउंटिंग आदि ट्रेड में प्रशिक्षण दिया गया। तीनों योजनाओं में अब तक आठ हजार से अधिक अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण दिया गया, जबकि 5646 उत्तीर्ण हुए। तीन हजार 618 प्रशिक्षुओं में तीन हजार से अधिक को कैंपस सेलेक्शन के माध्यम से नौकरी मिली, शेष ने स्वरोजगार शुरू कर दिया, लेकिन प्रशिक्षण लेने वाले दो हजार प्रशिक्षुओं को अब तक न नौकरी मिली और न ही वे स्वरोजगार शुरू कर सके हैं। कौशल विकास मिशन के जिला प्रबंधक रामअचल सिंह ने कहा कि प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद अधिक से अधिक युवाओं के रोजगार सृजन का प्रयास किया जाता है। नए वित्तीय वर्ष में लॉकडाउन के कारण प्रशिक्षुओं को नौकरी नहीं मिल सकी। स्थिति सामान्य होने पर सभी को रोजगार मुहैया कराने का प्रयास होगा।
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