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कांशीराम आवास : बिना रहे ही खंडहर हो गए 144 घर

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ज्ञानपुर। किसी योजना की दुर्दशा देखनी है तो सुरियावां के कैड़ा गांव जा सकते हैं। यहां कांशीराम आवास योजना के तहत बनाए गए 144 मकान 13 साल में खंडहर हो गए। इनमें एक भी दिन कोई नहीं रहा। इसका कारण सुविधाएं न होना रहा। अधिकतर आवासों में खिड़की और दरवाजे नहीं हैं। बिजली और पानी की भी समस्या है। परिसर में घास और झाड़ियां उग आई हैं। सिस्टम की लापरवाही के चलते इनका आवंटन भी फंसा है जबकि दूसरी तरफ बेघर आवास आवंटित होने का इंतजार कर रहे हैं।
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पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के कार्यकाल में शहरी गरीबों को आवास मुहैया कराने के लिए कांशीराम योजना के तहत आवास बनवाए। 2008-09 में करीब 27 करोड़ रुपये से ज्ञानपुर के कंसापुर में 1500 आवास का निर्माण किया गया। उनका आवंटन भी हो गया।
2011-12 में सुरियावां नगर पंचायत से करीब तीन किमी दूर कैड़ा गांव की सीमा पर 3 करोड़ रुपये की लागत से 144 और आवास बनाए गए। कार्यदायी संस्था आवास विकास परिषद ने निर्माण किया, लेकिन पेयजल व्यवस्था, विद्युतीकरण एवं कुछ आवासों में खिड़कियां आदि नहीं लगवाई गईं।
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2012 में विधानसभा चुनाव में सपा की सरकार बनने पर आवंटन लटक गया और काम पूरे नहीं हुए। 2017 में भाजपा की सरकार बनी मगर अधिकारियों ने आवासों की सुधि नहीं ली। आवंटन न होने से आवास खंडहर हो गए। तमाम जरूरतमंद एक दशक से आवास आवंटित होने का इंतजार कर रहे हैं। किसी के पुरसाहाल नहीं होने के कारण आवास परिसर में हर रोज नशेड़ी और अराजकतत्व पहुंचते हैं।
आवास की निगरानी में नपं उदासीन
ज्ञानपुर। कंसापुर में डेढ़ दशक पूर्व 1500 आवास बनाए गए। ज्ञानपुर, भदोही, खमरिया, घोसियां, नई बाजार के शहरी लोगों को आवास आवंटित किया गया। बसपा सरकार के समय कालोनियों में व्यवस्थाएं चुस्त-दुरूस्त रही, लेकिन सरकार बदलने के बाद स्थिति दिन ब दिन खराब होती गई। आलम यह है कि कंसापुर में पार्क जहां ध्वस्त हो गए हैं वहीं नालियों संग कालोनियों की सफाई भी कभी कभार होती है। इससे वहां रहने वाले लोगों को काफी परेशान होना पड़ता है।
काफी पहले आवास बना हुआ है। एक माह पहले इसकी जानकारी भी हुई थी। इसकी जांच कराई जा रही है। निर्माण मानकों में अनदेखी हुई या किस कारण आवंटित नहीं हुआ है। जांच के बाद ही पता चलेगा। -डॉ. श्याममणि त्रिपाठी, प्रभारी पीओ डूडा।
- कैड़ा में बने कांशी राम आवास को नगर पंचायत को हैंडओवर नहीं किया गया। आवास में कई कमियां है। नगर से दूरी होने के कारण आवंटी भी दिलचस्पी नहीं लिए।- सुजीत कुमार, ईओ सुरियावां नगर पंचायत।
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