सुरियावा। ब्लॉक के कैड़ा गांव में मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है। पेजयल और सफाई की समस्या के अलावा यहां की सड़कें इतनी जर्जर हैं कि इस पर पैदल चलना भी मुश्किल है। जबकि गांव की सड़क कटवार मार्ग होते हुए सीधे जौनपुर, मछलीशहर को जोड़ती है। मजे की बात है कि यह गांव सभी सरकारों में आदर्श गांव में शामिल हो चुका है, लेकिन इसकी तस्वीर कुछ खास नहीं बदल सकी।
जिले के पूर्व सांसद वीरेन्द्र सिंह मस्त के कार्यकाल में सुरियावां के कैड़ा गांव का चयन सांसद आदर्श गांव के रूप में हुआ था। सांसद आदर्श गांव में चयन होने के बाद ग्रामीणों को भरोसा हुआ कि गांव की मूलभूत समस्याएं दूर हो सकेंगी, लेकिन विडंबना है कि उनका भरोसा सिर्फ सपना बनकर रह गया। मजे की बात है कि इसके पहले भी कैड़ा गांव गांधीग्राम, लोहिया ग्राम और अंबेडकर गांव के रूप में चिह्नित हो चुका है, लेकिन गांव की तस्वीर में आज तक नहीं बदल सकी। गड्ढा युक्त उबड़-खाबड़ सड़कें और क्षतिग्रस्त पेजयल पाइप लाइन गांव के लोगों की समस्याओं को दुगुना कर रही हैँ। गांव के नरसिंह ने बताया कि गांव से गुजरने वाली कटवार मार्ग जौनपुर मछलीशहर को जोड़ती है। इस रोड पर हर दिन हजारों लोगों को आना-जाना होता है, ऐसे में राहगीर के साथ स्थानीय लोग भी धूल और गुबार से बेहाल होते हैँ। वहीं त्रिभुवन सिंह ने बताया कि गांव में लगी पेयजल पंप और टंकी से पूरे गांव को आपूर्ति नहीं मिलती। पाइपलाइन बिछाने के दौरान मानकों की अनदेखी करते हुए घटिया किस्म की पाइप बिछाई गई, जो हैंडओवर किए जाने के बाद जगह-जगह से फट रही है। वहीं अमन कुमार ने बताया गांव की रिहायशी जमीन ऊंचा और निचले स्तर पर है। गांव में जो पंप लगाया गया है, उससे ऊंचाई पर रहने वाले लोगों के घरों तक पानी नहीं पहुंच पाता। गांव के ही शिवकुमार पाल का कहना है कि पेय जल की उचित व्यवस्था होनी चाहिए। प्रधान पूनम तिवारी ने कहा कि कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का ध्यान आकृष्ट कराया गया, लेकिन कोई विशेष सुधार नहीं हो रहा है। जर्जर पाइप लाइन की मरम्मत में लगातार खर्च हो रहा है, लेकिन उसके लिए अलग से कोई बजट नहीं मिल रहा।