भदोही। कालीनों और हस्तनिर्मित उत्पादों में जूट के इस्तेमाल को बढ़ावा देने, कालीन उद्यमियों को समय समय पर इससे जुड़े सहयोग प्रदान करने के लिए जूट कारपोरेशन आफ इंडिया (जेसीआई) और भारतीय कालीन प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईसीटी) ने एक एमओयू (समझौता ज्ञापन) पर हस्ताक्षर किए हैं। भारत सरकार वस्त्र मंत्रालय के दोनों संस्थानों के अधिकारियों ने यह समझौता गत दिनों नई दिल्ली में भारत टेक्स 2024 के दौरान किया।
समझौते में जूट की उपलब्धता, हस्तनिर्मित उत्पादों में जूट के नए प्रयोग के साथ प्रतिस्पर्धी दर पर लोगों को जूट उपलब्ध कराना मुख्य हैं। कालीन उद्योग के लिए इसे अहम बताया जा रहा है।पिछले कुछ वर्षों में जूट का इस्तेमाल हस्तनिर्मित कालीनों और उत्पादों में लगातार बढ़ा है। ईको फ्रेंडली होने के नाते, आसानी से रिसाईकल हो जाने वाले जूट की मांग दुनियां भर में तेजी से बढ़ी है। आसानी से रंगाई हो जाने वाले जूट से कालीन उद्यमी पहले से ही उत्कृष्ट उत्पाद तैयार कर रहे हैं। जूट आधारित उत्पादों को बेहतर बनाने, इसमे आ रही दिक्कतों को दूर करने के नजरिए से पिछले दिनो आईआईसीटी ने जेसीआई और कालीन उद्यमियों के साथ सेमिनार कर लोगों से फीडबैक लिए थे। जिसमे उच्च कोटि के जूट की उलब्धता, प्रतिस्पर्धी कीमतों, तथा उनकी रंगाई, उसमे ऊन जैसी नर्मियत लाने के विषय पर चर्चा हुई थी। इस सेमिनार में जेसीआई के अधिकारी भी शामिल हुए थे।
आईआईसीटी के निदेशक डा.राजीव कुमार वार्ष्णेय ने बताया कि भारतटेक्स के तीसरे दिन भारत मंडपन में एक समारोह में हमने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। बताया इंडस्ट्री से सहयोग मिलने पर जेसीआई भदोही में अपना डिपो भी खोल सकता है। इसके अलावा दोनो संस्थान समय समय पर उद्यमियों को जूट के उपयोग पर भ्रांतियों को भी दूर करेंगे साथ ही उन्हें जूट के विशिष्ट उत्पाद तैयार करने में भी सहयोग देंगे।