गोपीगंज के बघेल छावनी में जंग बहादुर बघेल बाएं संग राष्ट्रपिता महात्मा गांधी। स्रोत: बघेल परिवा
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का भदोही से भावनात्मक रिश्ता रहा है। आजादी के आंदोलन में उनकी विचारधारा से प्रभावित बघेल परिवार ने स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाई थी।
इसी परिवार की वजह से बापू की अस्थियों का एक हिस्सा आज भी भदोही के गोपीगंज क्षेत्र स्थित रामपुर कायस्थान गांव में सुरक्षित है।
महात्मा गांधी की हत्या के बाद वर्ष 1948 में अंतिम संस्कार के पश्चात उनकी अस्थियां उनके कुछ निकट सहयोगियों और अनुयायियों को दी गई थीं। गोपीगंज के जमींदार परिवार से जुड़े स्वतंत्रता सेनानी जंग बहादुर सिंह बघेल बापू की अस्थियों का एक हिस्सा अपने साथ रामपुर कायस्थान ले आए।
उन्होंने इन्हें कलश में सुरक्षित रखकर अपनी जमीन पर एक स्मारक का निर्माण कराया। बापू और बघेल परिवार के बीच आत्मीय संबंध था। जंग बहादुर सिंह बघेल अपनी भतीजी कृष्णा सिंह और भतीजे हृदय नारायण सिंह के साथ गांधीजी के विचारों से प्रभावित होकर स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल हुए थे।
वह लंबे समय तक साबरमती और वर्धा आश्रम में भी रहे। जंग बहादुर सिंह बघेल के प्रपौत्र ऋषि सिंह बघेल ने बताया कि महात्मा गांधी काशी नरेश के समय गोपीगंज के बघेल परिवार के अतिथि भी बने थे। उनके अलावा पं.जवाहर लाल नेहरू, लोकनायक जयप्रकाश नारायण और विनोबा भावे जैसी महान विभूतियों का भी बघेल छावनी में आना-जाना रहा।
जंग बहादुर सिंह बघेल गांधीजी के बेहद करीब थे, लेकिन वह कभी प्रसिद्धि नहीं चाहते थे। इसी कारण गांधीजी की अस्थियों से जुड़े इस स्मारक को भी प्रचार से दूर रखा गया।