जिले में जलजीवन मिशन के तहत संचालित हर घर नल योजना का पानी उतर गया है।
डीघ ब्लॉक के चौराकला, रमईपुर और भावापुर में पानी की टंकी के लिए गड्ढा खोदकर तीन महीने से छोड़ दिया गया है। वहीं रामईपुर बैरी बीसा, जगापुर, ऊंज, रामकिशुनपुर बसहीं और जगदीशपुर गांव पानी की टंकियां छह महीने से सूखी हैं।
शासन की महत्वकांक्षी जनजीवन मिशन योजना के तहत हर गांव में पेयजल टंकियां बनाई जा रही है। इससे हर घर में नल से शुद्ध पेयजल पहुंचाने का कार्य किया जाना है। तकनीकी दिक्कतों के साथ-साथ विभागीय सुस्ती के कारण परियोजना की रफ्तार धीमी है।
कई जगहों पर टंकी नहीं बन सकी है और तो कई जगहों पर गड्ढा खोदकर छोड़ दिया गया है। डीघ ब्लॉक के आठ गांवों में यह परियोजना धरातल पर नहीं उतर सकी है। कहीं नवनिर्मित पानी की टंकी सूखी है तो कहीं टंकी की नींव के लिए गड्ढा खोदकर छोड़ा गया है। डीघ क्षेत्र के पिलखुना, रमईपुर, बैरी बीसा, जगापुर पडान, ऊंज, रामकिशुन बसही, बैरी बीसा बरईपुर, सराय जगदीश गांवों की आबादी 30 हजार से अधिक है।
यहां के लोग पेजयल के लिए हैंडपंप पर आश्रित है। गांवों में टंकी निर्माण शुरू होने पर लोगोें में उम्मीद जगी कि जल्द ही नलवाला शुद्ध पेयजल मिलेगा लेकिन कार्यदायी संस्था की सुस्ती के कारण उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया है।
लाखों का प्रोजेक्ट, महीनों से अधूरा पड़ा है कार्य : रमईपुर गांव 412.24 लाख के प्रोजेक्ट को स्वीकृति मिली है। इसी तरह चौराकला में 242.34 लाख रुपये से काम होना है। कार्य की जिम्मेदारी की कार्यदायी संस्था बेलस्पन कावेरी इंफ्रा प्रोजेक्ट को सौंपी गई है।
दोनों गांवों में तीन महीने से गड्ढा खोदकर छोड़ दिया गया है। पिलखुना, केदारपुर, ऊंज में भी पानी की टंकी का निर्माण अधूरा है। कार्यदायी संस्था की लापरवाही के कारण एक महत्वपूर्ण परियोजना का लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है।