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भाईचारे का मजहब है इस्लाम

Mon, 21 Mar 2016 01:25 AM IST
भदोही/ब्यूरो, अमर उजाला
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गोपीगंज के अमानत पैलेस में आयोजित सेमिनार में बोलते मौलाना सैयद मजहर मियां चिश्ती।
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इस्लाम ने हमेशा से इंसानियत और मोहब्बत का पैगाम दिया है और आगे भी देता रहेगा। इसे आतंक वाद से जोड़ना और आतंकवाद के  लिए इसे ढाल बनाना दोनों नाकाबिले बर्दाश्त है। जो कोई भी ऐसे सोचता और बोलता है वह अपनी संकीर्णता को दर्शाता है। यह बातें मुंबई से आए मौलाना यूसुफ  रजा कादरी ने कही।
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रविवार को अमानत पैलेस में आयोजित इस्लाम और आतंकवाद विषयक सेमिनार में बोलते हुए मौलाना ने कहा कि मौजूदा समय में देश में बेटी बचाओ अभियान चलाया जा रहा है। लेकिन पैगंबर-ए-इस्लाम ने 14 सौ साल पहले ही इसके लिए मुहिम चला दिया था।

नबी ने फरमाया जो तीन बेटियों की शादी करेगा, उसको जन्नत नसीब होगी। सहाबियों ने सवाल किया कि एक  और दो बेटियों वालों का क्या होगा। तो नबी ने फरमाया कि  अगर एक  ही बेटी है तो उसकी परवरिश, तालीम, मोहब्बत में कमी मत करो। खुदा जन्नत अता फरमाएगा।
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मौलाना ने कहा कि  इस्लाम भाईचारे का मजहब है, इस्लाम दूसरे मजहब और उसके मानने वालों की भी इज्जत करता है। इस्लाम जुल्म और ज्यादती करने वालों के हमेशा खिलाफ  रहता है। कार्यक्रम में गैर मुस्लिमों ने भी शिरकत की।

उन्होंने मौलाना की बातें सुनने के साथ ही इस्लाम को लेकर अपनी गलतफहमियां भी दूर की। इस मौके  पर मौलाना मोहम्मद ओवैश मिस्बाही, कारी गुलाम गौस, मौलाना जाहिद रजा मिस्बाही, हाफिज मोहम्मद अशरफ चिश्ती, नूर आलम, वारिस अली, हाफिज सलाहुद्दीन आदि रहे।
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