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ईरान-इस्राइल युद्ध : पोर्ट और कंपनियों के गोदामों में डंप है 350 करोड़ का कालीन

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नगर के एक प्रतिश्ठान में कालीनों की फिनिशिंग में जुटे मजदूर। स्रोत-संवाद
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भदोही। ईरान-इस्राइल युद्ध ने कालीन उद्योग के सामने नया संकट खड़ा कर दिया है। महाराष्ट्र के जेएनयू नावा खोवा पोर्ट पर इस समय लगभग 50 करोड़ का कालीन डंप है। देशभर के निर्यातकों की कंपनियों में भी कम से कम 300 करोड़ का माल डंप पड़ा है। युद्ध के कारण समुद्री मार्ग प्रभावित होने से निर्यातकों के माल डंप पड़े हैं। निर्यातकों में चिंता है कि अगर युद्ध लंबा खींचा तो कालीन उद्योग तबाह हो जाएगा।
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अमेरिकी टैरिफ की मार से निर्यातक अभी उबरे भी नहीं थे कि अब ईरान-इस्राइल के बीच छिड़ी जंग ने निर्यातकों को चिंतित कर दिया है। 17500 करोड़ के सालाना कारोबार वाले इस उद्योग का 95 फीसदी माल विभिन्न देशों में निर्यात होता है। कालीन का घरेलू बाजार मुश्किल से पांच फीसदी है।
निर्यातकों के सामने सबसे बड़ी समस्या है कि विश्व में कहीं भी उथल-पुथल होती है तो उसका प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर कालीन उद्योग पर असर जरूर पड़ता है। ईरान-इस्राइल में भारतीय कालीनों का निर्यात बहुत कम है, लेकिन युद्ध में शामिल अमेरिका में भारतीय कालीन के कुल निर्यात का 55 फीसदी यानि कि करीब 10 हजार करोड़ की हिस्सेदारी है। अमेरिका जाने वाला माल समुद्री और हवाई मार्ग से जाते हैं। युद्ध के कारण यह मार्ग बंद हैं।
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