जिले में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं के रिक्त पदों पर होने वाली भर्ती विवादों में फंस गई है। आरक्षण में गोलमाल की शिकायत पर डीएम के निर्देश पर सीडीओ भानु प्रताप सिंह ने जांच के लिए त्रिस्तरीय कमेटी गठित कर दी है। एक सप्ताह में अधिकारियों से जांच रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से जिले में 1492 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित है। इन केंद्रों पर करीब तीन हजार आंगनबाड़ी वर्कर और सहायिकाएं नियुक्त हैं। 60 साल से अधिक उम्र पार करने वाली वर्कर और सहायिकाओं को कुछ माह पूर्व कार्यमुक्त किया गया था। कुछ पद पूर्व से ही रिक्त चल रहे थे। शासन के निर्देश पर तीन माह पूर्व नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हुई। पंचायत चुनाव के कारण नियुक्ति रूक गई थी, लेकिन चुनाव खत्म होने पर प्रक्रिया आगे बढ़ी। नियम विरुद्ध आरक्षण बदलने का आरोप लगाते हुए अधिवक्ता आदर्श त्रिपाठी ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंप मामले की जांच कराने की मांग की। इस मामले में मुख्य विकास अधिकारी भानु प्रताप सिंह ने त्रिस्तरीय कमेटी जांच के लिए गठित की। जिसमें उपायुक्त स्वत: रोजगार श्यामजी को अध्यक्ष और जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी संतोष कुमार, जिला समाज कल्याण अधिकारी महेंद्र कुमार यादव को सदस्य नामित किया। उन्होंने जांच कमेटी में शामिल अधिकारियों को एक सप्ताह में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। बताते चलें कि नियुक्ति से पूर्व बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग में आंगनबाड़ी वर्करों से पैसे वसूलने का आडियो वायरल हुआ था। जिसको लेकर विभाग की काफी किरकिरी हुई थी।