ज्ञानपुर। गरीबों के हक पर डाका डालने वाले अपात्रों की मुश्किलें बढ़ने वाली है। अब जिले के 38 हजार 264 अंत्योदय कार्ड की जांच की जाएगी। खाद्य एवं रसद आयुक्त मनीष चौहान का पत्र आते ही पूर्ति महकमा सत्यापन की तैयारी में जुट गया है। इससे अपात्र कार्डधारकों की धड़कने भी बढ़ गई है।
ग्रामीण एवं शहरी इलाकों के गरीबों को सस्ते दर पर राशन उपलब्ध कराने के लिए सरकार कोटे की दुकान संचालित कर रही है। 744 दुकानों पर राशन वितरण के लिए जिले में पात्र गृहस्थी के तीन लाख और अंत्योदय 38 हजार कार्ड बने हैं। करीब एक दशक पूर्व अंत्योदय कार्ड बनाते समय बड़ी संख्या में धनाढ्य लोगों ने बनवा लिया जबकि आज भी पात्र वंचित है। दो सप्ताह पूर्व अपात्रों के नाम बन चुके अंत्योदय कार्डों को गंभीरता से लेकर जिलाधिकारी राजेंद्र प्रसाद ने मातहतों के साथ मंथन कर रिपोर्ट शासन को भेजा। निवर्तमान डीएसओ अमित कुमार तिवारी ने 30 फीसद अंत्योदय कार्डों के गलत हाथों में जाने की बात स्वीकार कर जुर्माना लगाते हुए दर्जन भर से अधिक कार्ड को सरेंडर कराया। बावजूद इसके ऊपर तक पहुंच रखने वाले कोटेदार, आपूर्ति निरीक्षक, एआरओ की मिलीभगत से अभी तक हजारों कुंतल राशन पात्रों के बजाय अपात्रों के हाथ लग रहा है लेकिन अब सच्चाई सामने आते ही पात्रों को लाभ दिलाने में आयुक्त का पत्र महती भूमिका भी निभाएगा।
डीएसओ सीमा सिंह ने बताया कि मामले को गंभीरता से लेकर एक-एक गांवों में कर्मचारियों को लगाकर पात्रता-अपात्रता परखी जाएगी। कहा कि अंत्योदय कार्ड के लिए स्वयं की जमीन, पक्के मकान, पालतू पशु, चार पहिया वाहन, स्थाई व्यवसाय, मुर्गी/गौ पालन, विता्तीय सहायता व्यवसाय और विद्युत कनेक्शरन नहीं होने चाहिए। पात्रता के लिए विधवा, दिव्यांग, गंभीर बीमारियों से ग्रसित परिवार, 60 वर्ष या अधिक आयु के व्यक्ति, आदिवासी, जनजाति पात्र हैं। बावजूद इसके मानकों की अनदेखी कर औराई, भदोही, अभोली, ज्ञानपुर, सुरियावां, डीघ ब्लाकों से जुड़े गांवों में बहुसंख्या में अपात्र अंत्योदय कार्ड बने है। जांच में कटने वाले कार्डों के स्थान पर अब कम से कम चार और अधिकतम सात यूनिट वाले ही पात्रता की श्रेणी में रखे जाएंगे।