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डग्गामार स्कूली वाहनों में ढोए जा रहे मासूम

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ज्ञानपुर। शासन की सख्ती का असर स्कूल संचालकों पर नहीं दिख रहा है। स्कूल वाहन के नाम पर अनट्रेंड हाथों में स्टेयरिंग और डग्गामार वाहन धड़ल्ले से दौड़ रहे हैं। गाजियाबाद की घटना के बाद भी जिले में संचालित स्कूल प्रबंधन नहीं चेत रहे हैं। आटो, फिटनेस फेल बस और मिनी बसों में बच्चों को स्कूल लाया और पहुंचाया जा रहा है। परिवहन विभाग सिर्फ चालान तक सिमटकर रह गया है। प्राइवेट विद्यालयों में बच्चों को ढोने के लिए नियम और कानून बने हैं। निर्धारित पीली रंग की बसों और उस पर लाल रंग की पट्टी व बीच में गोल निशान में स्कूल वाहन और आन स्कूल ड्यूटी लिखा होना चाहिए। इसके अलावा अन्य किन्हीं चार पहिया वाहनों को बच्चों को लाने-ले जाने के लिए अनुमति नहीं दी जाती। परिवहन विभाग चार पहिया वाहनों में केवल स्टाफ को ढोने की परमिट देती। इसके विपरीत हकीकत यह कि कुछ स्कूलों को छोड़ दिया जाए तो अधिसंख्य प्राइवेट स्कूलों में आटो रिक्शा और टैक्सी जैसे वाहनों से बच्चों को ढोया जा रहा है। इसमें न तो सुरक्षा मानक का भी कोई ध्यान नहीं दिया गया है। इसके साथ ही अप्रशिक्षित हाथों में वाहनों की स्टेयरिंग थमा दी जा रही है। गाजियाबाद की घटना के बाद भी भले ही शासन ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया हो लेकिन विद्यालय प्रबंधतंत्रों की तंद्रा नहीं भंग हो रही है। शुक्रवार को भी जीप, आटोरिक्शा और पिकअप जैसे वाहन बच्चों को लादकर सड़कों पर फर्राटा भरते रहे। परिवहन विभाग की माने तो अब भी 90 स्कूली वाहनों के फिटनेस फेल है। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी अरुण कुमार और यात्री कर निरीक्षक शारदा कुमार मिश्रा अलग-अलग क्षेत्रों में अभियान चलाकर 42 स्कूल वाहनों की जांच की। इसमें छह वाहनों में दो के फिटनेस फेल, दो का परमिट नहीं था जबकि दो मानक के अनुसार नहीं मिले। सभी का चालान किया गया। एआरटीओ ने बताया कि ज्ञानपुर के दुर्गागंज तिराहा, गोपीगंज में स्कूली वाहनों की जांच की गई। हिदायत दी कि किसी भी दशा में पिकअप, मारुति वैन, आटो से बच्चों का परिवहन नहीं करने दिया जाएगा। कहीं पर भी डग्गामार वाहनों से बच्चों को ढोते मिले तो चालक और मालिक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि अब तक 50 से अधिक वाहनों का चालान किया जा चुका है। फिटनेस फेल वाहन अगर सड़कों पर दिखेंगे तो उन्हें सीज किया जाएगा।
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