भारतीय कालीनों में अब तक पर्शियन और मार्डन डिजाइनों का समावेश अधिक देखने को मिला है। वैश्विक मांग देखते हुए भारतीय डिजाइनरों ने भी कभी भारतीय सभ्यता और मोटिफ को विकसित करने की ओर ध्यान नहीं दिया।
विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) कार्यालय के निर्देशानुसार संस्थान द्वारा तीन माह का कोर्स चलाया जाएगा जिसमें डिजाइनरों को भारतीय मोटिफ में दक्षता प्रदान की जाएगी। बुधवार को हुए प्रवेश परीक्षा में 40 सीटों के लिए 53 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
जबकि प्रवेश परीक्षा में भाग लेने के लिए 61 ने आवेदन किया था। डिजाइन डिपार्टमेंट के प्रमुख राजाशीष कर्माकर ने बताया कि अगले सप्ताह से प्रशिक्षण प्रारंभ होगा।
आज ही इंडिया नाट और स्नेहाभा कारपेट बैकिंग में दक्षता प्रदान करने के लिए भी प्रशिक्षुओं का चयन किया गया।
इस संदर्भ में निदेशक प्रो. केके गोस्वामी ने बताया कि संस्थान द्वारा नाटेड कालीनों के पारंपरिक गांठ से हट कर इंटिया नाट और टफ्टेड कालीनों के लिए स्नेहाभा बैकिंग विकसित किया गया है।
उल्लेखनीय है कि बुनाई के लिए नए बुनकरों और बैकिंग हेतु नए मजदूरों को प्रशिक्षित करने के लिए गुरूवार से प्रशिक्षण प्रारंभ हो रहा है। बताया कि बुनाई में और बैकिंग के लिए 30-30 प्रशिक्षू चयनित किए गए हैं। बताया कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल नि:शुल्क है बल्कि प्रत्येक को प्रतिदिन 100 रुपये स्टाइपेंड भी दिया जाएगा।