तीन सीजन से मौसम की मार झेल रहे किसानों को खरीफ सीजन में खाद-बीज के संकट से जूझना पड़ेगा। किसानों को क्रेडिट के सहारे खाद-बीज देकर कंगाल हो चुकीं 30 समितियों पर विभाग का लगभग सात करोड़ रुपये बकाया हैं। इसके चलते इन समितियों पर इस साल खाद-बीज नहीं मिलेगा। ऐसे में किसानों को दर-दर भटकना पड़ेगा। हालांकि विभाग का दावा है कि जिले में लक्ष्य से डेढ़ गुना खाद उपलब्ध है। समय आने पर किसानों को उपलब्ध कराया जाएगा।
समितियों पर खाद-बीज न होने से नर्सरी डालने से लेकर धान की रोपाई तक उन्हें निजी दूकानों का सहारा लेना पड़ेगा। करीब दो दशक के दौरान किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से खाद-बीज लेने वाले ढाई हजार किसानों ने बकाया नहीं जमा किया, जिससे समितियों पर करीब 7 करोड़ से अधिक का कर्ज है। पैसा न देने पर इफको समितियों पर खाद ही नहीं दे रहा है।
52 सहकारी समितियों में 12 पहले ही निष्क्रिय हो चुकी हैं। 40 समितियों में 20 समितियां ही बेहतर क्रेडिट के आधार पर इफको से खाद ले पा रही हैं।
एआर कोआपरेटिव विजय कुमार शुक्ला ने बताया कि आरबीआई ने 2012 में सहकारी बैंकों का लाइसेंस निरस्त कर दिया है, जिससे समितियों से खाद मिलना मुश्किल हो गया है। कुछ समितियां अपने क्रेडिट से खाद ला रहीं हैं। उन्होंने बताया कि जिले में डीएपी 618 एमटी लक्ष्य के सापेक्ष 945 एमटी रखी गई है, जबकि यूरिया भी दो हजार एमटी से अधिक है। धान का बीज 50 कुंतल आया है। नर्सरी डाले जाने तक और भी बीज आएगा।