भदोही के सुरियांवा में खुशी मनाते यशस्वी जायसवाल के परिजन
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आईपीएल में अपनी बल्लेबाजी से धमाल मचाने वाले यशस्वी जायसवाल का पूरा जीवन संघर्षों से भरा रहा है। शायद यही कारण है कि मैदान में जब वे उतरते हैं तो उनके खेल में क्रिकेट के प्रति वह जुनून दिखाई देता है। 11 साल की छोटी उम्र में वे मुंबई चले गए। मुंबई में उन्हें रहने के लिए भी कोई जगह नहीं थी। वे लगभग एक साल तक एक टेंट में रहे। गोलगप्पे भी बेचने पड़े। यशस्वी के बड़े पिता रमाकांत जायसवाल ने बताया कि यशस्वी छोटी उम्र से ही क्रिकेट के प्रति काफी जुनूनी था।
उसे इस मुकाम तक पहुंचाने में उसके पिता भूपेंद्र ने उसका काफी साथ दिया है। यशस्वी के पिता घर के कंपाउंड में ही घंटों तक यशस्वी को प्रैक्टिस कराते थे। इसके अलावा यशस्वी जब छोटा था तो जहां-जहां उसके मैच होते थे। वहां-वहां उसके पिता उसे लेकर जाते थे।
उन्होंने बताया कि यशस्वी के संघर्ष और कड़ी मेहनत ने उसे आज इस मुकाम तक पहुंचाया है। उसके घर में बड़ी मां मनोरम, लक्ष्मीकांत, माया देवी, रीता देवी के साथ भाई डॉ. विकास जायसवाल, विशाल, शिवम व अन्य लोगों ने एक-दूसरे का मुंह मीठा कराकर बधाई दी।
यशस्वी जायसवाल का चयन टीम इंडिया में होने से जहां परिजन और जिलेवासी खुश हैं। वहीं क्रिकेटर खिलाड़ियों का उत्साह दोगुना हो गया है। बचपन में जिन मैदानों में यशस्वी क्रिकेट का अभ्यास करता था। उन मैदानों में खिलाड़ियों ने जमकर जश्न मनाया। सुरियावां के मेढ़ी मैदान के साथ ही पाली स्थित मैदान में खिलाड़ियों का उत्साह देखते बनता था। खिलाड़ी जमकर जश्न मना रहे थे।
बचपन में उसे क्रिकेट बारीकियां सीखाने वाले आरिफ हुसैन ने बताया कि यशस्वी के अंदर क्रिकेट को लेकर एक दिवानगी थी। वह जब भी मैदान पर उतरता था तो एक अलग ही अंदाज में बैटिंग करता था। आज टीम इंडिया में यशस्वी का चयन होने के बाद अन्य खिलाड़ी भी काफी प्रोत्साहित हुए हैं।