जिले में स्वच्छ भारत मिशन की मुहिम पटरी से उतर चुकी है। एकल शौचालयों की तरह सामुदायिक शौचालय भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता दिख रहा है। प्रशासनिक स्तर से 546 ग्राम पंचायतों में शौचालयों का लोकार्पण हो चुका है, लेकिन अब भी 50 से अधिक शौचालय अपूर्ण है। बाहर से सामुदायिक शौचालयों का रंगरोगन देखकर एक बारगी सभी आकर्षित हो जाएंगे, लेकिन अंदर जाते ही अधूरा निर्माण देख दावों की पोल खुलकर सामने आ रही है। बहन-बेटियां शौच के लिए बाहर न जाएं, शौचालय घर में बनवाएं जैसे सरकारी स्लोगन सिर्फ कागजों में सिमटता जा रहा है। करीब 200 करोड़ की लागत से 546 ग्राम पंचायतों में दो लाख 35 हजार शौचालयों का निर्माण हुआ। इसमें 50 फीसदी से अधिक शौचालय बेकार हो चुके हैं। एक साल पूर्व शासन ने सभी ग्राम पंचायतों में आबादी के हिसाब से एक या दो सामुदायिक शौचालय के निर्माण को मंजूरी दी। जिसके लिए सात से लेकर 13 लाख का बजट स्वीकृत किया गया। जिले में तेजी से शौचालयों का निर्माण हुआ। जिस पर तीन करोड़ से अधिक रकम खर्च कर दिया गया, लेकिन धरातल पर स्थिति ठीक नहीं है। मंगलवार को अमर उजाला की टीम ने अभोली और सुरियावां ब्लॉक के दो ग्राम पंचायतों में पड़ताल की तो हकीकत सामने आ गई। मऊरामशाला में सामुदायिक शौचालय के बाहर रंगरोगन संग स्वच्छता से जुड़े तमाम स्लोगन लिखे मिले, हालांकि अंदर जाने पर न तो प्लास्टर था ना तो अंदर मिट्टी पाटी गई थी। वासबेसिन संग शौचालय में बैठने की व्यवस्था तक नहीं की गई थी जबकि बजट पूरा खर्च हो चुका है। सुरियावां ब्लॉक के अर्जुनपुर में अभी भी शौचालय अधूरा है। न तो अंदर प्लास्टर है ना पेंट किए गए है। आलम यह है कि शौचालय में बैठने की व्यवस्था नहीं है। ग्राम प्रधान ईन्नर सरोज और संतोष दुबे ने बताया कि शासन की मंशा है कि जब तक शौचालय पूरा नहीं होगा कोई नया कार्य नहीं कराया जाएगा। दोनो गांव को एक बानगी है। औराई के मेदनीपुर, दरवांसी सहित कई गावों में कमोबेश यही स्थिति है।