पर्यावरण को हरा भरा बनाने के लिए लाखों खर्च के बाद हर साल होने वाला पौधरोपण अभियान बेमानी साबित हो रहा है। नियमित पौधरोपण के बाद भी वातावरण से हरियाली गायब है। वन विभाग लक्ष्य से अधिक पौधरोपण का दावा करता है लेकिन संरक्षण न होने से पौधे कुछ समय में ही सूख जाते हैं। जो पौधे बचते हैं उसे मवेशी अपना निशाना बना लेते हैं।
पर्यावरण का संतुलन बेहतर बनाने के लिए हर साल वन विभाग की ओर से पौधरोपण कराया जाता है, हालांकि देखरेख के अभाव में 60 से 70 फीसदी पौधे या तो मवेशी तोड़ देते हैं नहीं तो गर्मी से सूख जाते हैं। विभागीय आंकड़े पर गौर किया जाए तो वर्ष 2015-16 में जिले में 96 हेक्टेअर में 63 हजार पौधे लगाने का लक्ष्य मिला था जिसे विभाग ने शत प्रतिशत पूरा करते हुए 64 हजार पौधों को रोपित किया हालांकि अन्य विभाग लक्ष्य के आसपास भी नहीं पहुंच सके। पिछले साल रोपे गए ज्यादातर पौधे सूख चुके हैं। खास बात यह है कि डीएम दफ्तर के सामने ही रोपा गया पौधा देखरेख के अभाव में सूख चुका है। इससे सरकार की सारी कवायद फेल होती नजर आ रही है। वित्तीय वर्ष 2016-17 में करीब 124 हेक्टेअर में एक लाख 16 हजार पौधे लगाने का लक्ष्य वन विभाग को मिला है जबकि मनरेगा, हरित पट्टिया और सीएम के विशेष अभियान के तहत करीब दो लाख पौधे रोपे जाने हैं। ऐसे में बेहतर संरक्षण न हुआ तो फिर ढाक के पात वाली कहावत चरितार्थ होगी। पौधे तो रोपे जाएंगे लेकिन वह कुछ समय में सूख जाएंगे।