तापमान में आए बदलाव के चलते हीट स्ट्रोक (लू) और डीहाईड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) की आशंका ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मौसम के बदले मिजाज से अस्पताल में रोगियों की संख्या बढ़ गई है। धूल, धुआं और गंदगी से श्वांस के रोगियों की संख्या भी अस्पताल में बढ़ी है। मंगलवार को ओपीडी में 1156 से अधिक मरीजों ने पर्ची कटवाई, इसमें 80 फीसदी से अधिक हीट स्ट्रोक, डी हाईड्रेशन और श्वांस रोग से पीड़ित रहे।
अप्रैल माह का पहला पखवारा ही चल रहा है, लेकिन तापमान ने सभी रिकार्ड अभी से तोड़ने शुरू कर दिए हैं। अप्रैल में ही जून सी गर्मी महसूस की जाने लगी है। पारा 40 से 41 तक पहुंच गया है। अचानक गर्मी बढ़ने के साथ ही लू के थपेड़ों ने लोगों को बेहाल कर दिया है। मौसम के बदलाव से हीट स्ट्रोक और डी हाईड्रेशन के साथ ही श्वांस के रोगियों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। जिला अस्पताल समेत निजी अस्पतालों में मरीजों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो गई है। बदले मौसम ने सबसे अधिक परेशानी बच्चों के लिए खड़ी कर दी है। शरीर में पानी की कमी होने से बच्चे उल्टी दस्त से जहां पीड़ित हैं, वहीं बड़े लोग भी हीट स्ट्रोक और श्वांस रोग से परेशान हैं।
चिकित्सकों का मानना है कि धूल, धुआं और गेहूं की मड़ाई के चलते निकलने वाले कणों से श्वांस रोगियों को मुश्किल हो रही है। इससे अस्पतालों में रोगियों की तादाद भी बढ़ रही है। जिला अस्पताल के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो मंगलवार को ओपीडी में 1156 से अधिक मरीजों ने पर्ची कटवाई, इसमें 80 फीसदी से अधिक हीट स्ट्रोक, डी हाईड्रेशन और श्वांस रोग से पीड़ित रहे। डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि मौसम में हो रहे बदलाव से हीट स्ट्रोक, डी हाईड्रेशन और श्वांस रोग का खतरा बढ़ गया है।