ज्ञानपुर। सरकार ने नई शिक्षा नीति के रूप में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ तो किया है, लेकिन विद्यालयों में उसे पूर्णत: लागू किए जाने पर विचार होने चाहिए।
नई शिक्षा नीति में कौशल विकास पर जोर दिया गया है, लेकिन संसाधन विहीन कॉलेजों के कारण यह फलीभूत नहीं हो पा रहा है। यह बातें अमर उजाला की ओर से शिक्षा और बेरोजगारी विषय पर आयोजित संवाद कार्यक्रम में हिंद फाउंडेशन के सचिव हरिकिशन शुक्ला ने कहीं।
उन्होंने बढ़ती बेरोजगारी पर चिंता व्यक्त करते हुए सकारात्मक कदम उठाने की मांग की। धीरज दुबे ने कहा कि देश आज आंतरिक और बाह्य रूप से मजबूत हुआ है, लेकिन देश की मजबूती लिए युवाओं का सशक्त होना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि युवाओं के लिए स्टार्टअप जैसी योजनाएं संचालित हैं, लेकिन वह धरातल पर कितना उतरा है।
शचींद्र पांडेय का कहना था कि युवाओं में इस समय धार्मिक चेतना जागृत हुई है। यह भारत जैसे सांस्कृतिक व अध्यात्मिक समृद्धि वाले देश के लिए अच्छी बात है। उन्होंने बढ़ती बेरोजगारी पर चिंता व्यक्त की। उत्तम पांडेय ने कहा कि शिक्षा हमेशा से नींव रही है। इसे मजबूत करने के बारे में सोचना होगा।
श्रेयांस शुक्ला ने कहा कि युवाओं की सोच में अब पहले से परिवर्तन आया है। उन्होंने इसके लिए सरकारी योजनाओं की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। प्रवीण रतन ने कहा कि शिक्षा और बेरोजगारी दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। अगर उत्कृष्ट शिक्षा का अभाव होगा तो बेरोजगारी की समस्या का समाधान मुमकिन नहीं है। अनुपम पांडेय ने स्कूल और कॉलेजों के ढांचागत सुधार की वकालत की।
वहीं मोहित उपाध्याय ने केएनपीजी के कृषि संकाय को अब तक संचालित न होने पर सवाल उठाया। बताया कि सालों से नियुक्ति का इंतजार है, लेकिन करोड़ों का भवन बनाकर खड़ा कर दिया गया, लेकिन शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हो सकी। यह बड़ी विडंबना है। सनी उपाध्याय ने भी उनकी बातों का समर्थन किया। इस दौरान सत्या सरोज, अमर शुक्ला, अनुपम पांडेय, राजेंद्र सरोज, आयुष जायसवाल, आलोक शर्मा ने भी विचार रखें।