मेरे देश की धरती सोना उगले... उगले हीरा मोती। यह वाक्य जिले के कुछ किसानों पर सटीक बैठ रहा है। कड़ी मेहनत और आधुनिक सुविधाओं से किसानों ने मुकाम हासिल कर लिया। गेेहूं, धान, उर्द, सरसों जैसी फसलों में रिकार्ड उत्पादन कर अब सम्मान के हकदार बन गए हैं। 23 दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जयंती पर जिले के 50 किसानों को प्रशासन की ओर से सम्मानित किया जाएगा।
सरकार खेती, पशुपालन, औद्यानिक व जैविक खेती के माध्यम से किसानों को समृद्ध बनाना चाहती है। ऐसे किसानों को अब प्रशासन की ओर से सम्मानित किया जाएगा। इसमें गेहूं उत्पादन में सरई मिश्रानी के देवी चरण 71.80 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन कर प्रथम पुरस्कार, पिपरी के रघुनाथ 70.40 क्विंटल के साथ दूसरा स्थान, सरसों में ज्ञानपुर के पूरेटीका निवासी वंशराज ने 35.80 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन कर प्रथम, जगरनाथपुर के बोधराम मौर्य 28.80 क्विंटल के साथ दूसरा स्थान, धान में संजय कुमार राय मूंसीलाटपुर ने 81 क्विंटल उत्पादन से प्रथम, खेतलपुर के छोटेलाल पटेल 80 क्विंटल, उर्द में शिवरामपुर के मेवालाल मौर्य 19 क्विंटल उत्पादन कर प्रथम और खेमईपुर के अखिलेश त्रिपाठी 18 क्विंटल द्वितीय स्थान प्राप्त किया।
वहीं खेती के साथ अमरूद की बागवानी गिरधरपुर की प्रभावती देवी, धान की खेती के साथ मत्स्य पालन में पटखौली की सुमित्रा देवी, डीघ ब्लॉक के भरतपुर के सतीश कुमार पाल को मधुमक्खी पालन, सुरियावां के जमुनीपुर निवासी तहसीलदार सिंह को केला की खेती, मिर्च में औराई के दीघवट की चंद्रावती देवी, फूलगोभी में रजईपुर के जंग बहादुर, बैगन उत्पादन में पचपटिया निवासी प्रवीण सिंह, टमाटर उत्पादन में महुआपुर की जड़ावती देवी, लौकी उत्पादन में डीघ के लखनपुर निवासी राधेश्याम मिश्र, फूलगोभी में सहसेपुर के प्रभुनाथ मिश्रा को प्रथम स्थान मिला।
संकर नस्ल गाय से 24 लीटर दूध उत्पादन किया
पशुपालन में देसी गाय से 16 लीटर प्रतिदिन उत्पादन करने पर अभोली के गुआली निवासी अधेश कुमार को प्रथम, औराई के उमापुर निवासी शेषमणि शुक्ला को 12 लीटर प्रतिदिन में दूसरा स्थान, संकर नस्ल गाय से एक दिन में 24 लीटर दूध उत्पादन करने पर सुरहन के शिवराम यादव को प्रथम, दूसरे सथान पर शैल बहादुर सिंह रहे।
नवधन गांव के प्रगतिशील किसान ह्दयतोष उपाध्याय ने जैविक विधि से बासमती की खेती करके अलग पहचान बनायी है। उन्होंने कहा कि रासायनिक व कीटनासक के उपयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति नष्ट हो रही है। वहीं मृदा का स्वास्थ भी खराब होता है। जैविक खेती से खेतों उर्वरक क्षमता भी बढ़ती ।
अभोली के दानूपुर पश्चिमपट्टी निवासी मल्लूराम बिंद धान और गेहूं की उन्नतिशील खेती के लिए सम्मानित होंगे। उन्होंने बताया कि गेंहू की नई-नई प्रजातियों को लेकर उनका खास जुड़ाव रहा है। इसके लिए सूचनाओं का संकलन और बीज इत्यादि के लिए काफी भागदौड़ करना पड़ता है, लेकिन जब फसल खड़ी होती है तो सकून मिलता है।